Follow us :

लिवर डिजीज: कारण, लक्षण, प्रकार और जांच

Talk to Health Expert

30 Sep, 2026

Dr. Nikunj Jain

Dr. Nikunj Jain

Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,

MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC

लिवर डिजीज: कारण, लक्षण, प्रकार और जांच

लिवर हमारे शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है। यह खाने से मिलने वाले पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, शरीर में ऊर्जा को स्टोर करने और शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने जैसे कई जरूरी काम करता है। जब लिवर की संरचना या उसका कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है, तो इसे लिवर डिजीज (Liver Disease) कहा जाता है। लिवर की बीमारी कई कारणों से हो सकती है, जैसे वायरल इंफेक्शन, शराब का अधिक सेवन, फैटी लिवर, कुछ दवाएं, ऑटोइम्यून बीमारी या आनुवंशिक समस्याएं।

लिवर डिजीज के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को थकान, पेट में परेशानी या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जबकि कुछ लोगों में बीमारी के शुरुआती समय में कोई साफ लक्षण नहीं होता। इसलिए सही समय पर लिवर डिजीज टेस्ट करवाना जरूरी हो सकता है, खासकर जब लक्षण, जोखिम या ब्लड टेस्ट में कोई असामान्यता दिखाई दे। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में लिवर की सेहत और उससे जुड़ी समस्याओं की जांच के लिए जरूरी डायग्नोस्टिक टेस्ट उपलब्ध हैं।

लिवर डिजीज क्या होती है?

लिवर डिजीज एक सामान्य शब्द है, जिसमें लिवर को प्रभावित करने वाली कई अलग-अलग बीमारियां शामिल होती हैं। कुछ बीमारियों में लिवर में सूजन हो सकती है, कुछ में फैट जमा हो सकता है और लंबे समय तक रहने वाली कुछ समस्याओं में लिवर पर स्कार टिश्यू बनने लगते हैं। लिवर की बीमारी का असर हल्का या गंभीर हो सकता है। सही बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट तथा इमेजिंग टेस्ट देखते हैं।

लिवर डिजीज के कारण क्या हैं?

लिवर डिजीज के कारण व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और जीवनशैली के अनुसार अलग हो सकते हैं।

वायरल इंफेक्शन

हेपेटाइटिस A, B और C जैसे वायरल इंफेक्शन लिवर को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ प्रकार के हेपेटाइटिस लंबे समय तक बने रह सकते हैं और लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

फैटी लिवर

लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने को फैटी लिवर कहा जाता है। यह मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। फैटी लिवर में कई बार लंबे समय तक कोई खास लक्षण नहीं दिखाई देते।

शराब का अधिक सेवन

लंबे समय तक अधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर की कोशिकाओं को नुकसान हो सकता है। इससे सूजन, लिवर डैमेज और आगे चलकर सिरोसिस जैसी समस्या हो सकती है।

दवाएं और अन्य पदार्थ

कुछ दवाएं, सप्लीमेंट्स और जहरीले पदार्थ कुछ लोगों में लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट्स के बारे में जानकारी देना जरूरी है।

ऑटोइम्यून बीमारियां

ऑटोइम्यून लिवर डिजीज में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर सकता है। ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस इसका एक उदाहरण है। इसकी जांच के लिए कई तरह के ब्लड टेस्ट, इमेजिंग और कभी-कभी लिवर बायोप्सी की जरूरत पड़ सकती है।

आनुवंशिक समस्याएं

कुछ लिवर डिजीज परिवार से मिलने वाली आनुवंशिक समस्याओं के कारण हो सकती हैं। इनमें Wilson disease और hemochromatosis जैसी स्थितियां शामिल हैं।

लिवर डिजीज के लक्षण क्या हैं?

लिवर डिजीज के लक्षण बीमारी के प्रकार और उसकी गंभीरता पर निर्भर करते हैं। कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं होता, जबकि अन्य लोगों में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। आम लक्षणों में शामिल हैं:

  • लगातार थकान या कमजोरी
  • भूख कम लगना
  • मतली या उल्टी
  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन
  • त्वचा में खुजली
  • त्वचा या आंखों का पीला होना
  • गहरे रंग का पेशाब
  • हल्के रंग का मल
  • आसानी से चोट लगना या ब्लीडिंग होना
  • पैरों या टखनों में सूजन
  • पेट में पानी जमा होने के कारण सूजन
  • बिना कोशिश के वजन कम होना

लिवर की गंभीर बीमारी में भ्रम, याददाश्त या सोचने में परेशानी और नींद में बदलाव जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में लिवर डिजीज की पुष्टि नहीं करता। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच और जरूरत के अनुसार टेस्ट जरूरी होते हैं।

लिवर डिजीज के प्रकार कौन-कौन से हैं?

लिवर डिजीज के प्रकार कई हो सकते हैं। कुछ आम प्रकार इस प्रकार हैं:

फैटी लिवर डिजीज

इसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ी फैटी लिवर बीमारी को आजकल MASLD भी कहा जाता है। शुरुआती अवस्था में अक्सर इसके कोई साफ लक्षण नहीं होते।

हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस का मतलब लिवर में सूजन है। यह वायरस, शराब, कुछ दवाओं, ऑटोइम्यून समस्या या अन्य कारणों से हो सकता है।

सिरोसिस

सिरोसिस में लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचने के कारण स्वस्थ लिवर टिश्यू की जगह स्कार टिश्यू बनने लगता है। इससे धीरे-धीरे लिवर का सामान्य काम प्रभावित हो सकता है।

ऑटोइम्यून लिवर डिजीज

इन बीमारियों में इम्यून सिस्टम लिवर को प्रभावित करता है। इनके लिए विशेष ब्लड टेस्ट और अन्य जांचों की जरूरत हो सकती है।

आनुवंशिक लिवर डिजीज

कुछ आनुवंशिक बीमारियां शरीर में आयरन या कॉपर जैसे पदार्थों के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करके लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

लिवर डिजीज की जांच कैसे होती है?

लिवर डिजीज का पता लगाने के लिए केवल एक टेस्ट पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टर आमतौर पर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण, शारीरिक जांच और टेस्ट रिपोर्ट को साथ में देखते हैं। स्थिति के अनुसार ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, CT Scan, MRI, elastography या कुछ मामलों में लिवर बायोप्सी की सलाह दी जा सकती है।

लिवर डिजीज टेस्ट कौन-कौन से होते हैं?

लिवर डिजीज टेस्ट का चुनाव बीमारी के संभावित कारण और मरीज की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

Liver Function Test (LFT)

LFT एक ब्लड टेस्ट है जिसमें ALT, AST, ALP, GGT, bilirubin, albumin और कुछ अन्य पदार्थों की जांच की जा सकती है। इससे लिवर में डैमेज या उसके काम करने में बदलाव के बारे में जानकारी मिल सकती है। हालांकि, LFT अकेले किसी खास लिवर बीमारी की पुष्टि नहीं करता।

हेपेटाइटिस टेस्ट

ब्लड टेस्ट की मदद से हेपेटाइटिस B और C जैसे वायरल इंफेक्शन की जांच की जा सकती है, जब डॉक्टर को इसकी जरूरत लगे।

लिवर अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड से लिवर की तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं। इससे लिवर के आकार और संरचना में बदलाव तथा कुछ मामलों में फैट जमा होने जैसी समस्याओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

CT Scan

CT Scan से लिवर और पेट के आसपास के अंगों की विस्तृत तस्वीरें मिल सकती हैं। डॉक्टर कुछ विशेष स्थितियों में इसकी सलाह दे सकते हैं।

MRI

MRI में मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो वेव्स की मदद से लिवर और आसपास के सॉफ्ट टिश्यू की विस्तृत इमेजिंग की जाती है।

Elastography

Elastography एक तरह की इमेजिंग जांच है, जिससे लिवर की stiffness यानी कठोरता को मापा जा सकता है। लिवर की ज्यादा stiffness fibrosis या स्कारिंग का संकेत हो सकती है।

Liver Biopsy

कुछ मामलों में लिवर बायोप्सी की जरूरत पड़ सकती है। इसमें लिवर के टिश्यू का एक छोटा सा सैंपल लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। हर मरीज को बायोप्सी की जरूरत नहीं होती।

क्या लिवर डिजीज बिना लक्षणों के भी हो सकती है?

हां। कुछ लिवर बीमारियां, खासकर फैटी लिवर, शुरुआती अवस्था में बहुत कम या बिल्कुल लक्षण नहीं देती हैं। कुछ लोगों में लिवर की बीमारी किसी दूसरे कारण से कराए गए ब्लड टेस्ट या इमेजिंग के दौरान भी पता चल सकती है। इसीलिए जिन लोगों में लिवर डिजीज का जोखिम अधिक है या जिनकी रिपोर्ट में लिवर से जुड़े टेस्ट असामान्य आते हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार आगे की जांच करानी चाहिए।

लिवर की जांच कब करवानी चाहिए?

अगर लगातार थकान, पीलिया, पेट में सूजन, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, गहरे रंग का पेशाब या अन्य चिंताजनक लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जिन लोगों को मोटापा, डायबिटीज, हेपेटाइटिस का जोखिम, शराब का अधिक सेवन, परिवार में लिवर डिजीज का इतिहास या ऐसी दवाओं का इस्तेमाल है जो लिवर को प्रभावित कर सकती हैं, उनमें भी डॉक्टर जरूरत के अनुसार लिवर की जांच की सलाह दे सकते हैं।

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में लिवर डिजीज की जांच

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में लिवर की सेहत से जुड़ी समस्याओं की जांच के लिए अलग-अलग डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीज की स्थिति के अनुसार ब्लड टेस्ट और इमेजिंग जांचों की मदद से लिवर की कार्यक्षमता, संरचना और संभावित समस्याओं का मूल्यांकन किया जा सकता है। किसी भी लिवर टेस्ट की रिपोर्ट को अकेले देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और दूसरी रिपोर्टों को साथ में देखकर आगे की जांच या इलाज तय करते हैं।

निष्कर्ष

लिवर डिजीज कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है और इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। लिवर डिजीज के लक्षण में थकान, भूख कम लगना, पेट में परेशानी, पीलिया, खुजली, सूजन और पेशाब या मल के रंग में बदलाव शामिल हो सकते हैं। हालांकि, कुछ लिवर बीमारियां शुरुआती अवस्था में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी रह सकती हैं। लिवर डिजीज के कारण जानने और बीमारी की स्थिति समझने के लिए LFT, हेपेटाइटिस ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, CT Scan, MRI, elastography और जरूरत पड़ने पर liver biopsy जैसी जांचों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सही लिवर डिजीज टेस्ट का चुनाव मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।

अगर आपको लिवर से जुड़े लगातार लक्षण हैं या आपकी रिपोर्ट में लिवर से संबंधित कोई बदलाव आया है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच करवाएं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में लिवर से जुड़ी विभिन्न डायग्नोस्टिक जांचों के माध्यम से आपकी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करने में सहायता की जाती है।

Frequently Asked Questions

लिवर डिजीज ऐसी स्थितियों का समूह है जो लिवर की संरचना या उसके सामान्य काम को प्रभावित करती हैं।

थकान, भूख कम लगना, पेट में परेशानी, पीलिया, खुजली, सूजन, गहरे रंग का पेशाब और हल्के रंग का मल इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं।

इसके कारणों में वायरल हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, शराब का अधिक सेवन, कुछ दवाएं, ऑटोइम्यून बीमारियां और आनुवंशिक समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

फैटी लिवर डिजीज, हेपेटाइटिस, सिरोसिस, ऑटोइम्यून लिवर डिजीज और कुछ आनुवंशिक लिवर बीमारियां इसके प्रमुख प्रकारों में शामिल हैं।

LFT, हेपेटाइटिस टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, CT Scan, MRI, elastography और कुछ मामलों में liver biopsy की सलाह दी जा सकती है।

नहीं। LFT लिवर में डैमेज या उसके काम में बदलाव का संकेत दे सकता है, लेकिन बीमारी का सही कारण जानने के लिए अन्य जांचों की जरूरत पड़ सकती है।

हां। फैटी लिवर में शुरुआती अवस्था में अक्सर बहुत कम या कोई लक्षण नहीं होते।

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में लिवर से संबंधित विभिन्न डायग्नोस्टिक जांचों की सुविधा उपलब्ध है। सही जांच के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

In News

Download Our App

Get Our Mobile App
for Easy Access

Book tests, view reports, and manage your health records on the go. Experience convenient healthcare with Molecular Diagnostics and Therapy.

  • ✔ Book tests & home collection
  • ✔ View reports instantly
  • ✔ Track health history
  • ✔ Get notifications & reminders
  • ✔ Easy appointment management
Your Health Companion
Scan to download Molecular Diagnostics and Therapy App

Scan to download the app