Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
जब डॉक्टर किसी जाँच की सलाह देते हैं, तो मन में कई सवाल आना बिल्कुल सामान्य है। कौन-सी जाँच होगी, इसकी तैयारी कैसे करनी है, खाली पेट रहना है या नहीं, जाँच में कितना समय लगेगा और रिपोर्ट कब मिलेगी—इन सब बातों की जानकारी पहले से होना जरूरी है। सही जानकारी मिलने से जाँच के दिन घबराहट कम होती है और आप अपनी जाँच के लिए ठीक तरह से तैयार होकर आ सकते हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में मरीजों को उनकी जाँच के अनुसार जरूरी तैयारी और प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है।
सबसे पहले डॉक्टर या जाँच केंद्र से यह जरूर पूछें कि आपकी कौन-सी जाँच होने वाली है और डॉक्टर ने यह जाँच क्यों लिखी है। एक ही बीमारी या शरीर के एक ही हिस्से के लिए अलग-अलग जाँचों की जरूरत हो सकती है। कभी सीटी जाँच, कभी एमआरआई और कभी अल्ट्रासाउंड ज्यादा उपयोगी हो सकता है। अगर आपकी पीईटी-सीटी जाँच की तारीख, सीटी जाँच की तारीख, एमआरआई जाँच की तारीख या अल्ट्रासाउंड जाँच की तारीख तय हो रही है, तो जाँच का सही नाम और उसका उद्देश्य पहले से समझ लेना अच्छा रहता है।
हर जाँच की तैयारी एक जैसी नहीं होती। कुछ जाँचों के लिए किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं होती, जबकि कुछ जाँचों में खाली पेट रहना, पानी पीना या किसी खास समय पर आना जरूरी हो सकता है। इसलिए अपनी जाँच की तारीख तय करते समय ही तैयारी के बारे में पूछ लें। खासकर पीईटी-सीटी, पेट के अल्ट्रासाउंड, कुछ सीटी जाँचों और कुछ एमआरआई जाँचों के लिए अलग-अलग निर्देश हो सकते हैं। इंटरनेट या किसी दूसरे मरीज की जाँच की तैयारी को अपनी जाँच पर लागू न करें।
यह सवाल जाँच से पहले जरूर पूछना चाहिए। हर जाँच के लिए खाली पेट रहना जरूरी नहीं होता। कुछ पीईटी-सीटी जाँचों में खाली पेट रहना जरूरी हो सकता है, जबकि कुछ पेट के अल्ट्रासाउंड या दूसरी विशेष जाँचों से पहले भी खाने-पीने से जुड़े निर्देश दिए जा सकते हैं। दूसरी ओर, कई सामान्य एमआरआई जाँचों में मरीज सामान्य रूप से खाना-पीना कर सकता है। इसलिए अपनी जाँच के लिए दिए गए निर्देशों का ही पालन करें और खुद से खाली पेट रहने या खाना खाने का फैसला न करें।
अगर आपको खाली पेट आने के लिए कहा गया है, तो यह भी पूछें कि उस दौरान सादा पानी पी सकते हैं या नहीं। कई जाँचों में सादा पानी पीने की अनुमति होती है, लेकिन कुछ जाँचों में अलग निर्देश दिए जा सकते हैं। चाय, कॉफी, दूध, जूस या दूसरे पेय पदार्थों के बारे में भी पहले से पूछ लेना अच्छा रहता है। इससे जाँच से पहले किसी तरह की गलती या परेशानी होने की संभावना कम हो जाती है।
अगर आप रोज कोई दवा लेते हैं, तो जाँच से पहले जरूर पूछें कि उसे सामान्य समय पर लेना है या नहीं। खासकर अगर आपको मधुमेह है और आप शुगर की दवा या इंसुलिन लेते हैं, तो जाँच केंद्र को पहले से इसकी जानकारी दें। कुछ जाँचों में खाने और दवाइयों से जुड़े विशेष निर्देश हो सकते हैं। अपनी मर्जी से कोई दवा बंद न करें और न ही उसकी मात्रा बदलें। आपको जो निर्देश दिए जाएं, उसी के अनुसार दवाइयाँ लें।
अगर पहले आपकी कोई जाँच हो चुकी है, तो उसकी रिपोर्ट और तस्वीरें साथ लाना उपयोगी हो सकता है। पुरानी और नई जाँच की तुलना करके डॉक्टर यह देख सकते हैं कि शरीर में कोई बदलाव हुआ है या स्थिति पहले जैसी है। खासकर अगर आप किसी बीमारी की निगरानी के लिए बार-बार जाँच करा रहे हैं, तो पुरानी रिपोर्ट काफी काम की हो सकती है। इसलिए अपनी पीईटी-सीटी जाँच की तारीख, सीटी जाँच की तारीख, एमआरआई जाँच की तारीख या अल्ट्रासाउंड जाँच की तारीख पर पुरानी रिपोर्ट साथ लाने के बारे में पहले पूछ लें।
हाँ, जाँच से पहले अपनी जरूरी स्वास्थ्य जानकारी जाँच करने वाली टीम को जरूर बताएं। अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है, पहले कोई बड़ी सर्जरी हुई है, किसी दवा से एलर्जी है या आप लंबे समय से कोई दवा ले रहे हैं, तो इसकी जानकारी दें। यह जानकारी खासकर तब जरूरी होती है जब जाँच में कोई विशेष दवा या पदार्थ इस्तेमाल किया जाना हो। सही जानकारी मिलने से जाँच की तैयारी और प्रक्रिया को आपकी जरूरत के अनुसार समझना आसान होता है।
हाँ, एमआरआई से पहले यह जानकारी बहुत जरूरी है। अगर आपके शरीर में पेसमेकर, कोई धातु की प्लेट, स्क्रू, क्लिप, इंप्लांट या कोई दूसरी चिकित्सा संबंधी चीज लगी है, तो जाँच की टीम को पहले ही बताएं। पहले हुई किसी सर्जरी की जानकारी भी दें। एमआरआई से पहले घड़ी, गहने, बेल्ट, हेयरपिन और दूसरी धातु की चीजें हटानी पड़ सकती हैं। कोई भी चीज छिपाने के बजाय पूरी जानकारी देना मरीज की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
कुछ जाँचों में शरीर के अंदर की चीजों को ज्यादा साफ देखने के लिए विशेष पदार्थ दिया जा सकता है। अगर ऐसी जरूरत हो, तो जाँच से पहले आपको इसके बारे में बताया जाएगा। अगर आपको पहले किसी दवा या ऐसे पदार्थ से एलर्जी या कोई परेशानी हुई है, तो इसकी जानकारी जरूर दें। किडनी की बीमारी, गर्भावस्था या किसी दूसरी जरूरी स्वास्थ्य समस्या की जानकारी भी पहले देना चाहिए, ताकि जाँच की टीम आपके लिए सही प्रक्रिया तय कर सके।
जाँच में लगने वाला समय जाँच के प्रकार और उसकी तैयारी पर निर्भर करता है। कुछ अल्ट्रासाउंड जाँच कम समय में पूरी हो सकती हैं, जबकि एमआरआई या पीईटी-सीटी जैसी जाँचों में ज्यादा समय लग सकता है। कुछ जाँचों में स्कैन शुरू होने से पहले भी तैयारी करनी पड़ती है। इसलिए अपनी पीईटी-सीटी जाँच की तारीख, सीटी जाँच की तारीख, एमआरआई जाँच की तारीख या अल्ट्रासाउंड जाँच की तारीख तय करते समय कुल कितना समय लग सकता है, यह पूछ लेना बेहतर रहता है।
यह जाँच के प्रकार पर निर्भर करता है। कई सामान्य जाँचों में किसी तरह का दर्द नहीं होता। कुछ जाँचों में शरीर की स्थिति बदलनी पड़ सकती है या नस में सुई लगाई जा सकती है, अगर किसी विशेष पदार्थ की जरूरत हो। जाँच शुरू होने से पहले प्रक्रिया के बारे में पूछने से आपको पता रहेगा कि क्या होने वाला है। अगर आपको किसी चीज से डर या परेशानी है, तो जाँच शुरू होने से पहले ही टीम को बता दें।
कई जाँचों में शरीर को स्थिर रखना जरूरी होता है, ताकि तस्वीरें साफ आ सकें। खासकर एमआरआई में हिलने-डुलने से तस्वीरें धुंधली हो सकती हैं और जाँच को दोबारा करने की जरूरत पड़ सकती है। जाँच के दौरान आपको बताया जाएगा कि कब स्थिर रहना है और कब सामान्य रूप से हिल सकते हैं। अगर आपको लंबे समय तक एक ही स्थिति में लेटना मुश्किल लगता है, तो जाँच शुरू होने से पहले टीम को इसकी जानकारी दें।
अगर आपको बंद जगह में घबराहट होती है या पहले एमआरआई के दौरान परेशानी हुई है, तो जाँच शुरू होने से पहले टीम को जरूर बताएं। एमआरआई मशीन के अंदर कुछ समय तक स्थिर रहना पड़ता है, इसलिए पहले से अपनी परेशानी बताने पर टीम आपको प्रक्रिया समझा सकती है और जरूरी मदद कर सकती है। अपनी परेशानी छिपाने की जरूरत नहीं है। जाँच करने वाली टीम का काम है कि आपको प्रक्रिया के बारे में समझाया जाए और आपकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाए।
यह जाँच के प्रकार पर निर्भर करता है। कई जाँचों के बाद मरीज अपने सामान्य काम कर सकता है, लेकिन अगर जाँच में कोई विशेष पदार्थ या दूसरी प्रक्रिया शामिल है, तो आपको कुछ खास निर्देश दिए जा सकते हैं। जाँच खत्म होने के बाद टीम से पूछ लें कि घर जाने के बाद आपको क्या करना है और क्या किसी चीज से बचना है। अगर डॉक्टर ने आगे कोई दूसरी जाँच या सलाह दी है, तो उसे भी ध्यान से समझ लें।
जाँच करवाने से पहले रिपोर्ट मिलने का समय पूछ लेना अच्छा रहता है। हर जाँच की रिपोर्ट तैयार होने में अलग-अलग समय लग सकता है और यह जाँच के प्रकार तथा रिपोर्ट की जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आपको रिपोर्ट किसी डॉक्टर को किसी खास तारीख पर दिखानी है, तो पहले से पता कर लें कि रिपोर्ट कब उपलब्ध होगी। अपनी रिपोर्ट मिलने के बाद उसे अपने डॉक्टर को दिखाएं और रिपोर्ट में लिखी बातों को समझने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।
बिल्कुल। अगर आपको किसी बात की जानकारी नहीं है या तैयारी को लेकर थोड़ी भी उलझन है, तो जाँच से पहले पूछना बेहतर है। खाने-पीने, दवाइयों, पानी, पुरानी रिपोर्ट, धातु की चीजों, जाँच में लगने वाले समय और रिपोर्ट मिलने की जानकारी पहले से होने पर जाँच का दिन काफी आसान हो सकता है। कोई भी सवाल छोटा या बेकार नहीं होता, खासकर जब बात आपकी जाँच और स्वास्थ्य से जुड़ी हो।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में मरीजों को उनकी जाँच के अनुसार जरूरी तैयारी और प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है। चाहे आपकी पीईटी-सीटी जाँच की तारीख, सीटी जाँच की तारीख, एमआरआई जाँच की तारीख या अल्ट्रासाउंड जाँच की तारीख तय हो, अपनी जाँच से पहले तैयारी से जुड़े सवाल पूछना जरूरी है। सही जानकारी के साथ जाँच के लिए आने से मरीज को प्रक्रिया समझने में आसानी होती है और जाँच को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलती है।
किसी भी जाँच से पहले सवाल पूछने में संकोच न करें। कौन-सी जाँच होगी, खाली पेट रहना है या नहीं, पानी पी सकते हैं या नहीं, दवाइयाँ लेनी हैं या नहीं, पुरानी रिपोर्ट लानी है या नहीं, जाँच में कितना समय लगेगा और रिपोर्ट कब मिलेगी—इन सभी बातों की जानकारी पहले से ले लें। हर जाँच और हर मरीज की जरूरत अलग होती है, इसलिए अपनी जाँच के लिए दिए गए निर्देशों को ही प्राथमिकता दें। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में मरीजों को उनकी जाँच के अनुसार जरूरी जानकारी और तैयारी के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि वे अपनी जाँच के लिए बेहतर तरीके से तैयार होकर आ सकें।
Book tests, view reports, and manage your health records on the go. Experience convenient healthcare with Molecular Diagnostics and Therapy.