Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
आधुनिक शहरी जीवन को अक्सर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और भोजन के अधिक विकल्पों से जोड़ा जाता है। फिर भी, आज शहरों में रहने वाले लोगों के बीच पोषण संबंधी कमियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। यह समस्या केवल कम भोजन मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्याप्त कैलोरी लेने के बावजूद आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होना भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण है।
व्यस्त दिनचर्या, अनियमित खान-पान, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर बढ़ती निर्भरता और शारीरिक गतिविधि की कमी ने लोगों की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। इसका परिणाम यह है कि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा तो मिल जाती है, लेकिन आवश्यक विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्व नहीं मिल पाते। शहरी आबादी में बढ़ती पोषण संबंधी कमियों के कारणों को समझना बेहतर स्वास्थ्य और रोगों की रोकथाम के लिए बेहद आवश्यक है।
छिपी हुई भूख क्या है?
पोषण की कमी को केवल कम भोजन खाने से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। आज शहरों में "छिपी हुई भूख" या हिडन हंगर एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। छिपी हुई भूख का अर्थ है कि व्यक्ति पर्याप्त या उससे अधिक कैलोरी का सेवन कर रहा है, लेकिन उसके शरीर में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे आयरन, विटामिन डी, विटामिन बी12, कैल्शियम, जिंक और फोलेट की कमी है।
इस प्रकार की कमी अक्सर लंबे समय तक पता नहीं चलती क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। लगातार थकान, कमजोरी, बाल झड़ना, एकाग्रता में कमी और बार-बार बीमार पड़ना जैसे लक्षण अक्सर तनाव या व्यस्त जीवनशैली का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
प्रसंस्कृत और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर बढ़ती निर्भरता
शहरी क्षेत्रों में पोषण संबंधी कमियों का एक प्रमुख कारण फास्ट फूड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन है। रेडी-टू-ईट भोजन, पैकेट वाले स्नैक्स, मीठे पेय पदार्थ और जंक फूड में कैलोरी, नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक होती है, जबकि इनमें आवश्यक विटामिन और खनिज बहुत कम होते हैं। लंबे कार्य घंटे, ट्रैफिक और समय की कमी के कारण लोग घर का पौष्टिक भोजन बनाने के बजाय सुविधाजनक विकल्प चुनते हैं। हालांकि ये खाद्य पदार्थ भूख तो मिटा देते हैं, लेकिन शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते।
शारीरिक गतिविधि और धूप की कमी
शहरी जीवनशैली में अधिकांश समय घर, कार्यालय या अन्य बंद स्थानों में बिताया जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती, जो विटामिन डी के निर्माण के लिए आवश्यक है। विटामिन डी की कमी आज शहरी आबादी में सबसे आम पोषण संबंधी समस्याओं में से एक बन गई है। इसकी कमी से हड्डियाँ कमजोर हो सकती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है और लगातार थकान महसूस हो सकती है। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधि की कमी भी शरीर के चयापचय और समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
शहरों में रहने वाले लोग अक्सर काम का दबाव, आर्थिक चिंताएँ, ट्रैफिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के कारण लगातार तनाव का सामना करते हैं। तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो भूख और खान-पान की आदतों को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोग तनाव में अधिक खाते हैं, जबकि कुछ लोग भोजन छोड़ देते हैं। लगातार तनाव पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है, जिससे शरीर पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। इसके साथ ही, तनावग्रस्त लोग अक्सर जंक फूड और मीठे खाद्य पदार्थों की ओर अधिक आकर्षित होते हैं।
व्यस्त दिनचर्या के कारण कई लोग समय पर भोजन नहीं कर पाते। नाश्ता छोड़ना, देर रात खाना खाना और बार-बार बाहर का खाना खाना शहरी जीवनशैली का सामान्य हिस्सा बन गया है। अनियमित भोजन से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते और चयापचय प्रक्रिया प्रभावित होती है। लंबे समय तक ऐसी आदतें पोषण संबंधी कमियों और कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
वजन कम करने और फिट रहने की चाह में लोग अक्सर बिना विशेषज्ञ सलाह के विभिन्न डाइट प्लान अपनाने लगते हैं। कुछ लोग कार्बोहाइड्रेट, डेयरी उत्पाद या अन्य खाद्य समूहों को पूरी तरह छोड़ देते हैं। यदि इन डाइट्स की सही योजना न बनाई जाए, तो विटामिन बी12, आयरन, कैल्शियम और फाइबर जैसी आवश्यक चीजों की कमी हो सकती है। सोशल मीडिया पर उपलब्ध अधूरी या गलत जानकारी भी लोगों को असंतुलित खान-पान की ओर प्रेरित कर सकती है।
वायु प्रदूषण, धूम्रपान, अत्यधिक कैफीन का सेवन, अपर्याप्त नींद और शराब का सेवन भी पोषण संबंधी कमियों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। ये कारक शरीर की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं और कुछ मामलों में पोषक तत्वों की आवश्यकता को भी बढ़ा देते हैं। उदाहरण के लिए, अत्यधिक शराब का सेवन विटामिन और खनिजों के अवशोषण में बाधा डाल सकता है, जबकि पर्याप्त नींद न लेने से भूख और चयापचय को नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं।
शहरों में रहने वाले लोगों में विटामिन डी, आयरन, विटामिन बी12, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक की कमी सबसे अधिक देखी जाती है। महिलाओं में आयरन की कमी अधिक आम है, जबकि शाकाहारी या सीमित आहार लेने वाले लोगों में विटामिन बी12 की कमी का खतरा अधिक होता है। इन कमियों की समय पर पहचान और उपचार से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।
पोषण संबंधी कमियाँ अक्सर धीरे-धीरे विकसित होती हैं और शुरुआती चरणों में इनके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। नियमित स्वास्थ्य जांच और रक्त परीक्षण के माध्यम से विटामिन और खनिजों की कमी का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यदि आपको लगातार थकान, कमजोरी, बाल झड़ना, बार-बार संक्रमण होना या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
बेहतर सुविधाओं और भोजन की उपलब्धता के बावजूद, शहरी आबादी में पोषण संबंधी कमियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, तनाव, अनियमित दिनचर्या, धूप की कमी और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के माध्यम से इन कमियों को रोका जा सकता है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध उन्नत प्रयोगशाला जांच और पोषण संबंधी परीक्षणों की सहायता से विटामिन और खनिजों की कमी का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य और व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित की जा सकती है।
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