Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
शरीर में संक्रमण होना बहुत आम बात है। कई बार संक्रमण आसानी से पता चल जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह शरीर के अंदर ऐसी जगह होता है जहां सामान्य जांच से उसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है। मरीज को लंबे समय से बुखार या दर्द हो सकता है, लेकिन यह समझ नहीं आता कि समस्या आखिर कहां है। ऐसे मामलों में डॉक्टर न्यूक्लियर मेडिसिन की मदद ले सकते हैं। इसकी खास जांचों से शरीर के अंदर उस जगह को ढूंढने में मदद मिलती है जहां संक्रमण या सूजन हो रही है। इन्फेक्शन इमेजिंग ऐसी ही जांच का एक तरीका है। इसमें एक खास दवा की बहुत थोड़ी मात्रा शरीर में दी जाती है। यह दवा शरीर के अंदर जाकर संक्रमण या सूजन वाली जगह को पहचानने में मदद करती है। इसके बाद एक खास कैमरे से शरीर की तस्वीरें ली जाती हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन की सुविधा उपलब्ध है, जहां ऐसी जांचें विशेषज्ञों की देखरेख में की जाती हैं। न्यूक्लियर मेडिसिन क्या होती है?
न्यूक्लियर मेडिसिन ऐसी जांच और इलाज की एक विधि है जिसमें शरीर के अंदर की गतिविधियों को समझने के लिए खास दवाओं की बहुत कम मात्रा का इस्तेमाल किया जाता है। आसान भाषा में समझें तो यह जांच सिर्फ यह नहीं देखती कि शरीर का कोई अंग कैसा दिख रहा है, बल्कि यह भी देखने में मदद करती है कि वह अंदर से कैसे काम कर रहा है। कुछ खास दवाएं शरीर के उन हिस्सों तक पहुंचती हैं जहां संक्रमण, सूजन या दूसरी असामान्य गतिविधि हो सकती है। इसके बाद एक खास मशीन से तस्वीरें ली जाती हैं। इससे डॉक्टर को बीमारी की सही जगह समझने में मदद मिल सकती है। इंफेक्शन इमेजिंग क्या है? इंफेक्शन इमेजिंग का मतलब है शरीर के अंदर संक्रमण वाली जगह को ढूंढने की कोशिश करना। मान लीजिए किसी व्यक्ति को कई दिनों से बुखार है, लेकिन खून की सामान्य जांच और दूसरी जांचों से यह साफ नहीं हो रहा कि बुखार किस वजह से है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर शरीर के अंदर किसी छिपे संक्रमण की तलाश कर सकते हैं। इन्फेक्शन इमेजिंग में खास दवा शरीर में दी जाती है। अगर शरीर के किसी हिस्से में संक्रमण या सूजन है, तो वहां इस दवा का असर तस्वीरों में दिखाई दे सकता है। इससे डॉक्टर को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि शरीर में समस्या किस जगह हो सकती है| संक्रमण के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन स्कैन कैसे होता है? इस जांच की प्रक्रिया काफी आसान होती है। सबसे पहले मरीज की नस में एक खास दवा की थोड़ी मात्रा दी जाती है। इसके बाद कुछ समय इंतजार किया जाता है ताकि दवा शरीर में फैल सके और उस जगह तक पहुंच सके जहां संक्रमण होने का शक है। फिर मरीज को एक खास मशीन पर आराम से लिटाया जाता है। मशीन शरीर की तस्वीरें लेती है। इन तस्वीरों को देखकर डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि शरीर के किस हिस्से में असामान्य गतिविधि हो रही है। जांच के दौरान आमतौर पर दर्द नहीं होता। मरीज को सिर्फ आराम से लेटे रहना होता है। गैलियम स्कैन क्या है? गैलियम स्कैन भी एक तरह का न्यूक्लियर मेडिसिन स्कैन है। इसका इस्तेमाल शरीर में संक्रमण और सूजन वाली जगह का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। इस जांच में गैलियम नाम की एक खास दवा शरीर में दी जाती है। यह दवा शरीर में घूमती है और कुछ मामलों में संक्रमण या सूजन वाली जगह पर जमा हो सकती है। इसके बाद एक खास कैमरे से शरीर की तस्वीरें ली जाती हैं। डॉक्टर इन तस्वीरों को देखकर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि शरीर में संक्रमण या सूजन कहां हो सकती है। हर मरीज के लिए गैलियम स्कैन जरूरी नहीं होता। डॉक्टर मरीज की समस्या और दूसरी जांचों को देखकर तय करते हैं कि यह जांच करवानी चाहिए या नहीं। डॉक्टर इन्फेक्शन इमेजिंग कब करवाते हैं? डॉक्टर इस तरह की जांच तब सुझा सकते हैं जब संक्रमण की सही जगह पता नहीं चल रही हो। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को लंबे समय से बुखार है लेकिन सामान्य जांचों से बुखार का कारण पता नहीं चल रहा है। ऐसे में डॉक्टर शरीर के अंदर किसी छिपे संक्रमण की तलाश कर सकते हैं। अगर हड्डी, शरीर के किसी अंग या दूसरे हिस्से में संक्रमण का शक हो और सामान्य जांच से पूरी जानकारी न मिल रही हो, तब भी ऐसी जांच मदद कर सकती है। कुछ मामलों में इलाज शुरू होने के बाद भी जांच की जरूरत पड़ सकती है ताकि यह देखा जा सके कि संक्रमण कम हो रहा है या नहीं। क्या यह जांच सुरक्षित होती है? हां, न्यूक्लियर मेडिसिन स्कैन आमतौर पर सुरक्षित होता है। इसमें खास दवा की बहुत कम मात्रा का इस्तेमाल किया जाता है। जांच में दी गई दवा धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकल जाती है। अधिकतर लोगों को जांच के बाद कोई खास परेशानी नहीं होती। फिर भी अगर आप गर्भवती हैं, गर्भधारण की योजना बना रही हैं या बच्चे को दूध पिला रही हैं, तो जांच से पहले डॉक्टर को जरूर बताएं। इस जांच का फायदा क्या है? इस जांच का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे शरीर के अंदर छिपे संक्रमण की जगह ढूंढने में मदद मिल सकती है। कई बार मरीज को दर्द या बुखार तो होता है, लेकिन सामान्य जांच से यह पता नहीं चलता कि समस्या कहां है। ऐसी स्थिति में न्यूक्लियर मेडिसिन की जांच डॉक्टर को ज्यादा जानकारी दे सकती है। इससे डॉक्टर को आगे की जांच और इलाज तय करने में मदद मिलती है। क्या हर मरीज को यह जांच करवानी पड़ती है? नहीं। हर संक्रमण के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन स्कैन की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर पहले मरीज के लक्षण, खून की जांच और दूसरी रिपोर्ट देखते हैं। इसके बाद अगर उन्हें लगता है कि शरीर के अंदर संक्रमण की जगह ढूंढना जरूरी है, तो वे उचित जांच की सलाह देते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के यह जांच करवाने की जरूरत नहीं है।
जांच के लिए सही जगह चुनना क्यों जरूरी है? ऐसी जांच के लिए अच्छे और भरोसेमंद जांच केंद्र का चुनाव करना जरूरी है। सही मशीन और अनुभवी विशेषज्ञ होने से जांच की तस्वीर और रिपोर्ट को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां मरीजों की जांच अनुभवी विशेषज्ञों की देखरेख में की जाती है और रिपोर्ट को ध्यान से तैयार किया जाता है। निष्कर्ष शरीर में होने वाला हर संक्रमण बाहर से दिखाई नहीं देता। कई बार संक्रमण शरीर के अंदर छिपा होता है और सामान्य जांच से उसकी सही जगह पता नहीं चलती। ऐसे मामलों में इन्फेक्शन इमेजिंग और दूसरी न्यूक्लियर मेडिसिन जांचें डॉक्टर को समस्या की जगह समझने में मदद कर सकती हैं। गैलियम स्कैन भी ऐसी ही एक जांच है, जिसका इस्तेमाल कुछ मामलों में संक्रमण और सूजन का पता लगाने के लिए किया जाता है। अगर डॉक्टर आपको ऐसी जांच कराने की सलाह देते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर जांच कराने से बीमारी की वजह और जगह समझने में मदद मिल सकती है, जिससे डॉक्टर आपके लिए सही इलाज तय कर सकें। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की मदद से मरीजों को भरोसेमंद जांच की सुविधा दी जाती है।
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