Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद भी समय-समय पर जांच कराना बहुत जरूरी होता है। कई लोगों को लगता है कि इलाज खत्म होने के बाद अब उन्हें किसी जांच की जरूरत नहीं है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। कुछ मामलों में कैंसर दोबारा भी हो सकता है। अगर इसका समय रहते पता चल जाए, तो इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है और अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए कैंसर के लिए पीईटी-सीटी जांच को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई बार कैंसर दोबारा होने पर शुरुआत में कोई परेशानी या लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे समय में कैंसर विशेषज्ञ पीईटी-सीटी जांच, एफडीजी पीईटी-सीटी जांच और संपूर्ण शरीर पीईटी-सीटी जांच डॉक्टरों को यह जानने में मदद करती हैं कि कैंसर वापस आया है या नहीं और अगर आया है तो शरीर के किस हिस्से में है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में नई तकनीक की मदद से पीईटी-सीटी जांच की जाती है, जिससे सही और भरोसेमंद रिपोर्ट मिलती है।
कैंसर का दोबारा होना क्या होता है?
जब कैंसर का इलाज पूरा होने के कुछ समय बाद वही बीमारी फिर से दिखाई देने लगे, तो उसे कैंसर का दोबारा होना कहा जाता है। यह उसी जगह पर हो सकता है जहाँ पहले कैंसर था। कई बार यह शरीर के पास वाले हिस्सों में या किसी दूसरे अंग में भी हो सकता है। इसलिए इलाज के बाद भी डॉक्टर नियमित जांच कराने की सलाह देते हैं।
इलाज के बाद जांच क्यों जरूरी होती है?
इलाज पूरा होने के बाद कई मरीज बिल्कुल ठीक महसूस करते हैं। लेकिन कभी-कभी शरीर में कुछ कैंसर की कोशिकाएँ बच जाती हैं। समय के साथ ये फिर से बढ़ सकती हैं। अगर समय-समय पर जांच होती रहे, तो ऐसी स्थिति का जल्दी पता लगाया जा सकता है। इससे डॉक्टर सही समय पर फिर से इलाज शुरू कर सकते हैं।
कैंसर के लिए पीईटी-सीटी जांच क्या है?
कैंसर के लिए पीईटी-सीटी जांच एक ऐसी जांच है जो शरीर के अंदर की साफ तस्वीर दिखाती है। इसके साथ यह भी पता चलता है कि शरीर के किस हिस्से में कोशिकाएँ सामान्य से ज्यादा काम कर रही हैं। इससे डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि कहीं कैंसर फिर से तो नहीं आया है।
एफडीजी पीईटी-सीटी जांच कैसे काम करती है?
एफडीजी पीईटी-सीटी जांच में मरीज को एक खास तरह का द्रव दिया जाता है। कैंसर की कोशिकाएँ सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा ऊर्जा लेती हैं। इसलिए वे इस द्रव को ज्यादा मात्रा में अपने अंदर ले लेती हैं। इसके बाद मशीन पूरे शरीर की तस्वीरें लेती है और डॉक्टर देख सकते हैं कि कैंसर कहाँ मौजूद है। इसी वजह से यह जांच इलाज के बाद भी बहुत काम आती है।
संपूर्ण शरीर पीईटी-सीटी जांच क्यों की जाती है?
कई बार कैंसर शरीर के किसी दूसरे हिस्से में भी दोबारा हो सकता है। ऐसे में सिर्फ एक जगह की जांच करना काफी नहीं होता। संपूर्ण शरीर पीईटी-सीटी जांच से डॉक्टर यह जान सकते हैं कि—
कैंसर दोबारा हुआ है या नहीं?
अगर हुआ है तो शरीर के किस हिस्से में है?
कितनी जगह पर फैला है?
बीमारी कितनी बढ़ी हुई है।
इसके आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है।
किन लोगों को पीईटी-सीटी जांच की जरूरत पड़ सकती है?
अगर इलाज के बाद फिर से दर्द होने लगे, बिना वजह वजन कम होने लगे, बहुत ज्यादा थकान रहने लगे, शरीर में नई गाँठ महसूस हो, लगातार खाँसी आए या कोई दूसरी परेशानी दिखाई दे, तो डॉक्टर पीईटी-सीटी जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं होते, फिर भी डॉक्टर समय-समय पर यह जांच करवाने की सलाह देते हैं।
कैंसर विशेषज्ञ पीईटी-सीटी जांच क्यों जरूरी है?
कैंसर विशेषज्ञ पीईटी-सीटी जांच से डॉक्टर यह देख सकते हैं कि इलाज कितना असरदार रहा है और कैंसर दोबारा तो नहीं आया। अगर बीमारी का जल्दी पता चल जाए, तो इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सकता है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक मशीनों की मदद से कैंसर की सही जांच की जाती है।
पीईटी-सीटी जांच कितनी सही होती है?
पीईटी-सीटी जांच की सटीकता काफी अच्छी मानी जाती है। यह शरीर के अंदर की तस्वीरों के साथ-साथ कैंसर की गतिविधि की भी जानकारी देती है। फिर भी डॉक्टर जांच की रिपोर्ट को मरीज की दूसरी जांचों, लक्षणों और स्वास्थ्य की पूरी जानकारी के साथ देखकर ही अंतिम फैसला लेते हैं।
पीईटी-सीटी जांच रिपोर्ट में क्या लिखा होता है?
पीईटी-सीटी जांच रिपोर्ट में बताया जाता है कि—
शरीर के कौन-कौन से हिस्से सामान्य हैं?
कहाँ कोई बदलाव दिखाई दे रहा है?
पहले की तुलना में कितना सुधार हुआ है?
कैंसर दोबारा होने के संकेत हैं या नहीं?
रिपोर्ट को हमेशा डॉक्टर की सलाह के साथ ही समझना चाहिए।
जांच से पहले क्या करना चाहिए?
पीईटी-सीटी जांच से पहले डॉक्टर कुछ जरूरी बातें बताते हैं। अक्सर जांच से पहले कुछ घंटों तक खाली पेट रहने के लिए कहा जाता है। अगर किसी को मधुमेह है, तो उसके लिए अलग सलाह दी जा सकती है। जांच वाले दिन ज्यादा भाग-दौड़ या भारी काम नहीं करना चाहिए। अपनी पुरानी जांच रिपोर्ट और इलाज से जुड़े सभी कागज़ात साथ लेकर जाएँ।
क्या हर बार कैंसर दोबारा होने पर लक्षण दिखाई देते हैं?
नहीं। कई बार शुरुआत में कोई भी लक्षण नहीं होते। इसीलिए डॉक्टर इलाज पूरा होने के बाद भी समय-समय पर जांच कराने की सलाह देते हैं, ताकि बीमारी का पता जल्दी चल सके।
समय पर जांच क्यों जरूरी है?
अगर कैंसर का जल्दी पता चल जाए, तो इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है। इससे बीमारी के बढ़ने को रोकने में मदद मिलती है और अच्छे परिणाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। समय-समय पर डॉक्टर से मिलना और नियमित जांच कराना लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी है।
निष्कर्ष
कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद भी नियमित जांच कराना बहुत जरूरी होता है। कैंसर के लिए पीईटी-सीटी जांच, एफडीजी पीईटी-सीटी जांच, संपूर्ण शरीर पीईटी-सीटी जांच और कैंसर विशेषज्ञ पीईटी-सीटी जांच कैंसर के दोबारा होने का जल्दी पता लगाने में मदद करती हैं।
सही पीईटी-सीटी जांच रिपोर्ट की मदद से डॉक्टर बीमारी की पूरी स्थिति समझ सकते हैं और समय पर सही इलाज शुरू कर सकते हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक मशीनों, अनुभवी विशेषज्ञों और भरोसेमंद रिपोर्ट के साथ पीईटी-सीटी जांच की सुविधा उपलब्ध है।
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