Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
मेडिकल इमेजिंग ने उस प्रक्रिया को बहुत अधिक उन्नत बना दिया है जिसके माध्यम से चिकित्सक अधिकांश बीमारियों, विशेष रूप से कैंसर, का पता लगाते हैं और उनका उपचार करते हैं। PET-CT स्कैन आज उपयोग में आने वाली सबसे आधुनिक और परिष्कृत इमेजिंग तकनीकों में से एक है। यह एक शक्तिशाली और उपयोगी इमेजिंग तकनीक है, जिसमें PET (पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी) को CT (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) के साथ जोड़ा जाता है, ताकि न केवल यह पता चल सके कि शरीर कैसे कार्य कर रहा है बल्कि शरीर की संरचना की विस्तृत तस्वीरें भी मिल सकें।
हालाँकि आजकल PET-CT स्कैन बहुत लोकप्रिय हैं, फिर भी कई लोग इनके बारे में गलत धारणाएँ रखते हैं। ये गलतफहमियाँ तब डर, अनिश्चितता या हिचकिचाहट पैदा कर सकती हैं जब किसी चिकित्सक द्वारा आपको यह परीक्षण कराने के लिए कहा जाता है। इन व्यापक मिथकों से जुड़े तथ्यों को जानने से आपको इस प्रक्रिया के बारे में अधिक आश्वस्त और जागरूक महसूस करने में मदद मिलती है।
मिथकों पर चर्चा करने से पहले पहला कदम यह समझना है कि PET-CT स्कैन कैसे किया जाता है। मरीज के शरीर में थोड़ी मात्रा में रेडियोधर्मी ट्रेसर इंजेक्ट किया जाता है। यह ट्रेसर उन क्षेत्रों को उजागर करता है जहाँ चयापचय गतिविधि अधिक होती है, और यह कैंसर, संक्रमण या सूजन जैसी स्थितियों का संकेत दे सकता है।
PET भाग असामान्य चयापचय के स्थान को दिखाता है, जबकि CT भाग शरीर की संरचनाओं की स्पष्ट तस्वीर देता है। इन दोनों का संयोजन डॉक्टरों को शरीर के भीतर क्या हो रहा है इसका बहुत सटीक चित्र प्रदान करता है।
PET-CT स्कैन का उपयोग निदान, स्टेजिंग, उपचार की योजना बनाने और कैंसर थेरेपी की प्रगति की निगरानी के लिए सामान्य रूप से किया जाता है। इनका उपयोग कुछ न्यूरोलॉजिकल और कार्डियक मूल्यांकन में भी किया जाता है।
फिर भी, मरीजों के बीच PET-CT स्कैन की सुरक्षा, उपयोगिता और प्रभावशीलता को लेकर कई मिथक अभी भी प्रचलित हैं।
अधिकांश लोग मानते हैं कि PET-CT स्कैन खतरनाक होते हैं क्योंकि इनमें विकिरण का उपयोग होता है।
तथ्य: यदि PET-CT स्कैन पेशेवर तरीके से किया जाए तो यह हानिकारक नहीं होता। विकिरण का स्तर सख्ती से चिकित्सकीय रूप से स्वीकार्य सीमा के भीतर नियंत्रित किया जाता है। यह अन्य नियमित इमेजिंग परीक्षणों के समान होता है।
डॉक्टर उच्च स्तर के सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज सुरक्षित रहें। सही निदान और उपचार योजना के लाभ अक्सर छोटे जोखिमों से कहीं अधिक होते हैं।
कई लोग सोचते हैं कि PET-CT स्कैन का उपयोग केवल कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है।
तथ्य: कैंसर में PET-CT का व्यापक उपयोग होता है, लेकिन यह अन्य बीमारियों में भी उपयोगी है। इसका उपयोग कुछ मस्तिष्क रोगों की जाँच, संक्रमण की पहचान, हृदय के कार्य का अध्ययन और सूजन संबंधी रोगों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।
यह स्कैन डॉक्टरों को यह समझने में मदद करता है कि ऊतक और अंग कैसे कार्य कर रहे हैं, जो कैंसर से परे चिकित्सा के कई क्षेत्रों में उपयोगी है।
मरीजों को डर होता है कि स्कैन असुविधाजनक या दर्दनाक होगा।
तथ्य: PET-CT स्कैन दर्द रहित होता है। हल्की असुविधा केवल ट्रेसर इंजेक्शन के कारण हो सकती है, जो एक सामान्य रक्त परीक्षण या इंट्रावेनस इंजेक्शन के समान होता है। ट्रेसर दिए जाने के बाद आप थोड़ी देर आराम करते हैं और फिर स्कैन शुरू होता है।
स्कैन के दौरान मरीज बस एक स्कैनिंग टेबल पर लेटता है जो धीरे-धीरे इमेजिंग मशीन के अंदर से गुजरती है।
एक और गलतफहमी यह है कि स्कैन प्रक्रिया में मशीन के अंदर कई घंटे लगते हैं।
तथ्य: पूरी PET-CT प्रक्रिया आमतौर पर लगभग 60 से 90 मिनट लेती है। इसमें ट्रेसर के शरीर में फैलने का समय भी शामिल होता है। वास्तविक स्कैनिंग प्रक्रिया लगभग 20 से 30 मिनट की होती है।
अधिकांश लोग इस प्रक्रिया को आसानी से पूरा कर लेते हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि PET-CT किसी भी चिकित्सकीय समस्या का पता लगा सकता है।
तथ्य: यद्यपि PET-CT तकनीक उन्नत है, लेकिन इसे हर स्थिति की पहचान के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। डॉक्टर इसे किसी विशेष समस्या के लिए सबसे उपयुक्त परीक्षण के रूप में लिखते हैं।
कुछ स्थितियों में अन्य इमेजिंग विधियाँ जैसे अल्ट्रासाउंड, MRI या CT स्कैन अधिक उपयुक्त हो सकती हैं।
एक और मिथक यह है कि हर कैंसर मरीज को PET-CT स्कैन करवाना ही पड़ता है।
तथ्य: डॉक्टर यह तय करते हैं कि PET-CT स्कैन की आवश्यकता है या नहीं, यह कैंसर के प्रकार, उसके फैलाव और रोगी की क्लिनिकल स्थिति पर निर्भर करता है। यह हर कैंसर मामले के लिए आवश्यक परीक्षण नहीं है।
यह तभी सुझाया जाता है जब यह निदान, स्टेजिंग या उपचार की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकता हो।
कुछ मरीज मानते हैं कि उन्हें स्कैन के तुरंत बाद परिणाम मिल जाएंगे।
तथ्य: स्कैन के बाद न्यूक्लियर मेडिसिन और रेडियोलॉजी के विशेषज्ञ छवियों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं। यह समीक्षा निष्कर्षों को सटीक और विस्तृत बनाती है।
यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है, जिसके बाद अंतिम रिपोर्ट उस चिकित्सक को भेजी जाती है जिसने परीक्षण के लिए रेफर किया होता है।
कई बुजुर्ग मरीज चिंता करते हैं कि यह स्कैन उनके लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।
तथ्य: यदि डॉक्टर द्वारा सुझाया गया हो तो PET-CT स्कैन सभी आयु समूहों के लिए सुरक्षित होता है। परीक्षण से पहले मेडिकल टीम हर मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सुरक्षित और उपयुक्त है।
केवल उम्र PET-CT स्कैन कराने में बाधा नहीं होती।
Book tests, view reports, and manage your health records on the go. Experience convenient healthcare with Molecular Diagnostics and Therapy.