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मिर्गी: कारण, लक्षण, प्रकार और जांच

Talk to Health Expert

04 Sep, 2026

Dr. Nikunj Jain

Dr. Nikunj Jain

Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,

MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC

मिर्गी: कारण, लक्षण, प्रकार और जांच

मिर्गी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें दिमाग की सामान्य गतिविधि में बार-बार असामान्य बदलाव होने के कारण दौरे पड़ सकते हैं। दौरा पड़ने पर हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। कुछ लोगों में शरीर में झटके आते हैं, जबकि कुछ लोगों को कुछ समय के लिए होश या आसपास की जानकारी कम हो सकती है।

मिर्गी किसी भी उम्र में हो सकती है। कई बार इसका कारण पता नहीं चल पाता, जबकि कुछ मामलों में सिर पर चोट, दिमाग से जुड़ी बीमारी, संक्रमण या अन्य कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सही समय पर डॉक्टर से जांच और सलाह मिलने से मिर्गी को समझने और नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में विभिन्न स्वास्थ्य जांच और डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जो डॉक्टरों को मरीज की स्थिति का आकलन करने और आगे की जांच या उपचार की योजना बनाने में सहायता कर सकती हैं।

मिर्गी क्या होती है?

मिर्गी दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार बिना किसी स्पष्ट कारण के दौरे पड़ सकते हैं। दौरे के दौरान दिमाग की गतिविधि कुछ समय के लिए असामान्य हो जाती है।दौरा हमेशा शरीर में तेज झटकों के रूप में नहीं होता। कुछ लोगों में कुछ सेकंड के लिए व्यक्ति आसपास की बातों का जवाब देना बंद कर सकता है या कुछ समय के लिए उसकी जागरूकता कम हो सकती है। इसलिए हर दौरे को देखकर मिर्गी मान लेना सही नहीं है। डॉक्टर जांच और पूरी मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर इसका पता लगाते हैं।

मिर्गी के सामान्य लक्षण

मिर्गी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि दौरा दिमाग के किस हिस्से से शुरू होता है और किस तरह की मिर्गी है।कुछ सामान्य लक्षणों में अचानक शरीर में झटके आना, कुछ समय के लिए आसपास की जानकारी कम होना, कुछ समय तक एक ही जगह देखना, अचानक प्रतिक्रिया देना, असामान्य हरकतें करना या दौरे के बाद कुछ समय तक भ्रम की स्थिति रहना शामिल हो सकता है।कुछ लोगों को दौरे से पहले अलग तरह की अनुभूति भी हो सकती है, जैसे अचानक अजीब गंध या स्वाद महसूस होना, पेट में अजीब महसूस होना या अचानक डर जैसा लगना। हालांकि, ये लक्षण दूसरी स्थितियों में भी हो सकते हैं।

मिर्गी के कारण क्या हो सकते हैं?

मिर्गी के कई संभावित कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों में इसका कारण स्पष्ट नहीं होता। अन्य मामलों में दिमाग को प्रभावित करने वाली कुछ स्थितियां मिर्गी का कारण बन सकती हैं।सिर पर गंभीर चोट, जन्म के समय दिमाग को हुई चोट, दिमाग में संक्रमण, स्ट्रोक, कुछ आनुवंशिक कारण या दिमाग में किसी तरह का असामान्य बदलाव इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं।हर मरीज में कारण अलग हो सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीज की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण और जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखकर कारण समझने की कोशिश करते हैं।

मिर्गी के कितने प्रकार होते हैं?

मिर्गी को आमतौर पर दौरे की शुरुआत और दिमाग में होने वाली गतिविधि के आधार पर अलग-अलग प्रकारों में समझा जाता है।

फोकल मिर्गी

इस प्रकार में दौरा दिमाग के किसी एक हिस्से से शुरू होता है। व्यक्ति की जागरूकता सामान्य रह सकती है या कुछ समय के लिए कम हो सकती है। लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि दिमाग का कौन-सा हिस्सा प्रभावित है।

सामान्यीकृत मिर्गी

इसमें दौरे के दौरान दिमाग के दोनों हिस्सों में असामान्य गतिविधि शामिल हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति की जागरूकता में बदलाव या शरीर में झटके जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

मिश्रित प्रकार

कुछ लोगों में फोकल और सामान्यीकृत दोनों तरह के दौरे हो सकते हैं। मिर्गी के प्रकार को समझने के लिए डॉक्टर लक्षणों और जांच रिपोर्ट को ध्यान से देखते हैं।

मिर्गी की जांच कैसे की जाती है?

मिर्गी का पता लगाने के लिए केवल एक ही टेस्ट पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टर पहले मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। अगर किसी व्यक्ति ने दौरे के दौरान कुछ देखा है, तो परिवार के सदस्य या आसपास मौजूद व्यक्ति की जानकारी भी डॉक्टर के लिए उपयोगी हो सकती है।इसके बाद डॉक्टर जरूरत के अनुसार ईईजी, ब्रेन इमेजिंग जैसे एमआरआई या सीटी स्कैन, और कुछ मामलों में रक्त की जांच की सलाह दे सकते हैं।

ईईजी जांच क्या होती है?

ईईजी यानी इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम एक ऐसी जांच है, जिसमें सिर की त्वचा पर लगाए गए छोटे सेंसर की मदद से दिमाग की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड किया जाता है।यह जांच डॉक्टर को दिमाग की असामान्य विद्युत गतिविधियों के बारे में जानकारी देने में मदद कर सकती है। हालांकि, सामान्य ईईजी आने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को मिर्गी नहीं है। डॉक्टर इसे अन्य जानकारी और जांच के साथ देखते हैं।

एमआरआई या सीटी स्कैन की जरूरत कब पड़ सकती है?

कुछ मरीजों में डॉक्टर दिमाग की संरचना को देखने के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन की सलाह दे सकते हैं। इन जांचों से दिमाग में किसी चोट, बदलाव या अन्य समस्या के बारे में जानकारी मिल सकती है।कौन-सी इमेजिंग जांच जरूरी है, यह मरीज की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर के आकलन पर निर्भर करता है।

क्या हर दौरा मिर्गी होता है?

नहीं। हर दौरा मिर्गी के कारण नहीं होता। कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं जो दौरे जैसे लग सकते हैं।इसी कारण खुद से मिर्गी की पहचान करना या दवा शुरू करना सही नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है या बार-बार ऐसे एपिसोड हो रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

मिर्गी का इलाज कैसे किया जाता है?

मिर्गी का इलाज उसके प्रकार, कारण, दौरे की स्थिति और व्यक्ति के स्वास्थ्य के अनुसार तय किया जाता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दवाएं और नियमित फॉलो-अप की सलाह दे सकते हैं।कुछ मरीजों में इलाज के लिए विशेषज्ञ द्वारा अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। दवा की मात्रा या दवा बंद करने का फैसला हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है, दौरा लंबे समय तक चलता है, बार-बार दौरे आते हैं, दौरे के बाद व्यक्ति सामान्य स्थिति में नहीं लौट रहा है या दौरे के दौरान चोट लगी है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।अगर किसी व्यक्ति को पहले से मिर्गी है और दौरे के पैटर्न में अचानक बदलाव आता है, तो भी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मिर्गी की जांच के लिए सही डायग्नोस्टिक सेंटर क्यों जरूरी है?

मिर्गी की जांच में मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण और अलग-अलग जांचों की रिपोर्ट को साथ में समझना जरूरी होता है। इसलिए जांच के लिए ऐसी सुविधा चुनना बेहतर होता है जहां जरूरी डायग्नोस्टिक सेवाएं और प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध हों।मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में विभिन्न डायग्नोस्टिक और लैब जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो डॉक्टरों को मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने में सहायता करती हैं।

निष्कर्ष

मिर्गी दिमाग से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जिसमें बार-बार दौरे पड़ सकते हैं। इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं और हर दौरा मिर्गी के कारण नहीं होता। सिर पर चोट, संक्रमण, आनुवंशिक कारण और दिमाग से जुड़ी कुछ अन्य समस्याएं इसके संभावित कारण हो सकते हैं।ईईजी, एमआरआई, सीटी स्कैन और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों से डॉक्टर को स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। समय पर डॉक्टर से सलाह लेना, सही जांच करवाना और निर्धारित उपचार का पालन करना मिर्गी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी आधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाओं के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जांच और डॉक्टरों के मूल्यांकन में सहायता प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

मिर्गी दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ सकते हैं। दौरे के दौरान शरीर में झटके आना, कुछ समय के लिए होश में बदलाव या अचानक एकटक देखने जैसे लक्षण हो सकते हैं।

मिर्गी में अचानक शरीर में झटके आना, कुछ समय के लिए बेहोशी, एकटक देखना या आसपास की बातों का जवाब न देना जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में दौरे के दौरान कुछ समय के लिए बोलने या समझने में भी परेशानी हो सकती है।

मिर्गी होने के कई कारण हो सकते हैं। सिर में चोट, दिमाग से जुड़ी कुछ बीमारियां, जन्म के समय हुई कुछ समस्याएं और आनुवंशिक कारण इसके पीछे हो सकते हैं। कई लोगों में जांच के बाद भी इसका साफ कारण पता नहीं चल पाता।

मिर्गी कई प्रकार की हो सकती है। कुछ दौरों में दिमाग के एक हिस्से पर असर पड़ता है, जबकि कुछ में दिमाग के दोनों हिस्सों पर असर हो सकता है। दौरे का प्रकार व्यक्ति के लक्षणों और दिमाग में होने वाली गतिविधियों के आधार पर समझा जाता है

मिर्गी की जांच के लिए चिकित्सक व्यक्ति के लक्षणों, दौरे के समय हुई घटनाओं और पहले की बीमारी के बारे में जानकारी लेते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार दिमाग की विद्युत गतिविधि की जांच, दिमाग की तस्वीर लेने वाली जांच और कुछ खून की जांच कराई जा सकती है।

इस जांच से दिमाग में होने वाली विद्युत गतिविधियों को समझने में मदद मिलती है। चिकित्सक इसका इस्तेमाल दौरे के प्रकार और मिर्गी से जुड़ी जानकारी समझने के लिए कर सकते हैं।

नहीं, हर बार दौरा पड़ने का मतलब मिर्गी होना जरूरी नहीं है। कुछ दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी दौरे जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है।

मिर्गी का इलाज व्यक्ति की स्थिति, दौरे के प्रकार और उसके कारण पर निर्भर करता है। चिकित्सक जरूरत के अनुसार दवाइयां या अन्य उपचार बता सकते हैं। नियमित जांच और चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार लेना जरूरी है।

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