Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
कैंसर का पता चलने के बाद डॉक्टरों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि कैंसर केवल एक जगह तक सीमित है या शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल गया है। जब कैंसर अपने शुरुआती स्थान से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलता है, तो इसे फैला हुआ कैंसर कहा जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर अलग-अलग जांचों की मदद से बीमारी की स्थिति को समझते हैं। पूरे शरीर की एमआरआई भी कुछ मरीजों में ऐसी ही एक जांच हो सकती है।
पूरे शरीर की एमआरआई एक विशेष प्रकार की जांच है, जिसमें शरीर के कई हिस्सों की तस्वीरें एक ही जांच के दौरान ली जा सकती हैं। सामान्य एमआरआई में अक्सर शरीर के किसी एक हिस्से, जैसे सिर, रीढ़, पेट या जोड़ की जांच की जाती है। इसके विपरीत, पूरे शरीर की एमआरआई में शरीर के बड़े हिस्से को एक साथ देखा जा सकता है। इस जांच में चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एक्स-रे जैसी विकिरण वाली किरणों का इस्तेमाल नहीं होता। हालांकि, पूरे शरीर की एमआरआई हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होती। डॉक्टर मरीज की बीमारी, लक्षण, पिछली जांचों और स्वास्थ्य की स्थिति को देखकर तय करते हैं कि यह जांच जरूरी है या नहीं।
जब किसी व्यक्ति को कैंसर होता है, तो डॉक्टर यह समझने की कोशिश करते हैं कि बीमारी कितनी फैली हुई है। कुछ मामलों में पूरे शरीर की एमआरआई शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले बदलावों को देखने में मदद कर सकती है। यह जांच कुछ स्थितियों में हड्डियों, मांसपेशियों और शरीर के अंदर मौजूद नरम ऊतकों में होने वाले बदलावों को देखने के लिए उपयोगी हो सकती है। इससे डॉक्टर को बीमारी की स्थिति समझने और आगे की जांच या इलाज की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
पूरे शरीर की एमआरआई में शरीर के कई हिस्सों की तस्वीरें ली जा सकती हैं। इसमें सिर, गर्दन, छाती, पेट, कमर के नीचे का हिस्सा, रीढ़ और हड्डियां शामिल हो सकती हैं। जांच में किन हिस्सों को देखा जाएगा, यह मरीज की जरूरत और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। अगर शरीर के किसी खास हिस्से को ज्यादा विस्तार से देखना जरूरी हो, तो डॉक्टर उस हिस्से की अलग एमआरआई या किसी दूसरी जांच की सलाह भी दे सकते हैं।
पूरे शरीर की एमआरआई से शरीर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें मिलती हैं। इन तस्वीरों की मदद से डॉक्टर शरीर में दिखाई देने वाले कुछ असामान्य बदलावों को देख सकते हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि बीमारी शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित कर रही है। हालांकि, केवल एमआरआई की रिपोर्ट के आधार पर हर स्थिति में कैंसर के फैलने की अंतिम पुष्टि नहीं की जाती। डॉक्टर एमआरआई के परिणामों को मरीज के लक्षणों, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, पहले की जांचों और जरूरत पड़ने पर दूसरी जांचों या ऊतक की जांच के परिणामों के साथ देखते हैं।
अगर डॉक्टर ने पूरे शरीर की एमआरआई कराने की सलाह दी है, तो जांच से पहले इसके बारे में पूरी जानकारी लेना अच्छा रहता है। मरीज को यह पता होना चाहिए कि जांच से पहले किसी खास तैयारी की जरूरत है या नहीं, जांच में कितना समय लग सकता है और क्या जांच से पहले कुछ खाना या पीना रोकना होगा।
अगर शरीर में कोई धातु की वस्तु, दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाला उपकरण या कोई दूसरी चिकित्सीय मशीन लगी है, तो एमआरआई कराने से पहले इसकी जानकारी डॉक्टर और जांच केंद्र को देना जरूरी है। कुछ मामलों में शरीर के अंदर की तस्वीरों को बेहतर तरीके से देखने के लिए एक विशेष दवा दी जा सकती है। इसकी जरूरत है या नहीं, इसका फैसला डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार करते हैं।
अगर आप अपने आसपास पूरे शरीर की एमआरआई कराने के लिए अच्छे जांच केंद्र की तलाश कर रहे हैं, तो केवल कीमत या घर से दूरी देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। जांच केंद्र की सुविधाओं, एमआरआई मशीन, जांच करने वाली टीम के अनुभव और रिपोर्ट देखने वाले विशेषज्ञ जैसी बातों पर ध्यान देना बेहतर रहता है। मरीज अपने आसपास के एमआरआई जांच केंद्रों के बारे में जानकारी ले सकते हैं और जांच कराने से पहले केंद्र से मशीन, जांच की तैयारी, जांच में लगने वाला समय और रिपोर्ट से जुड़ी जरूरी जानकारी पूछ सकते हैं।
एमआरआई कराने से पहले डॉक्टर से यह समझना जरूरी है कि यह जांच क्यों कराई जा रही है और इससे किस तरह की जानकारी मिलने की उम्मीद है। मरीज यह भी पूछ सकते हैं कि जांच से पहले किसी खास तैयारी की जरूरत है या नहीं, जांच में कितना समय लगेगा और क्या एमआरआई के साथ किसी दूसरी जांच की भी जरूरत पड़ सकती है। कैंसर की जांच और इलाज हर मरीज में अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल इंटरनेट पर मिली जानकारी के आधार पर खुद से पूरे शरीर की एमआरआई कराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करवाना बेहतर होता है।
पूरे शरीर की एमआरआई कुछ कैंसर मरीजों में शरीर के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति समझने में मदद कर सकती है, खासकर तब जब डॉक्टर को कैंसर के शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैलने की संभावना की जांच करनी हो। हालांकि, यह जांच हर कैंसर मरीज के लिए जरूरी नहीं होती। इसका इस्तेमाल कैंसर के प्रकार, मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, लक्षण और डॉक्टर की सलाह के आधार पर किया जाता है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में किसी भी जांच से पहले मरीज की व्यक्तिगत जरूरत और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है। सही समय पर उचित जांच कराने से बीमारी की स्थिति समझने और आगे के इलाज की योजना बनाने में डॉक्टर को मदद मिल सकती है।
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