Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक आम कैंसर है। कई मामलों में इसका पता शुरुआती जांचों के दौरान चल जाता है, लेकिन कुछ मरीजों में यह जानना जरूरी होता है कि कैंसर प्रोस्टेट तक सीमित है या शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका है। ऐसे मामलों में डॉक्टर अलग-अलग जांचों की मदद लेते हैं। इन्हीं आधुनिक जांचों में PSMA PET-CT स्कैन भी शामिल है।
PSMA PET-CT एक न्यूक्लियर मेडिसिन जांच है, जिसमें PET और CT स्कैन को एक साथ किया जाता है। इसमें एक विशेष रेडियोट्रेसर का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर में PSMA नामक प्रोटीन से जुड़ता है। प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं में सामान्य कोशिकाओं की तुलना में PSMA की मात्रा अक्सर अधिक होती है, इसलिए यह जांच कैंसर से जुड़े हिस्सों को पहचानने और उनकी जगह का पता लगाने में मदद कर सकती है।
PSMA का पूरा नाम Prostate-Specific Membrane Antigen है। यह एक प्रोटीन है जो सामान्य और कैंसर वाली प्रोस्टेट कोशिकाओं की सतह पर पाया जाता है। प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं में इसकी मात्रा अधिक हो सकती है। PSMA PET-CT में मरीज को नस के जरिए थोड़ी मात्रा में PSMA से जुड़ा रेडियोट्रेसर दिया जाता है। यह शरीर में घूमकर उन कोशिकाओं से जुड़ सकता है जिनमें PSMA मौजूद होता है। इसके बाद PET स्कैन शरीर में रेडियोट्रेसर के जमा होने की जानकारी देता है, जबकि CT स्कैन उस जगह की विस्तृत तस्वीर देता है। दोनों तरह की जानकारी मिलकर डॉक्टर को बीमारी की जगह और फैलाव समझने में मदद करती है।
PSMA PET-CT का इस्तेमाल खास तौर पर यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि प्रोस्टेट कैंसर कहां तक फैला है। यह लिम्फ नोड्स, हड्डियों या शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर के संभावित फैलाव की पहचान में मदद कर सकता है। यह जांच उन मरीजों में भी उपयोगी हो सकती है जिनका इलाज पहले हो चुका है, लेकिन बाद में PSA बढ़ने के कारण कैंसर के दोबारा लौटने की आशंका हो। ऐसे मामलों में PSMA PET-CT कैंसर के दोबारा आने की जगह और संभावित फैलाव का पता लगाने में मदद कर सकता है।
इस जांच में इस्तेमाल किया जाने वाला रेडियोट्रेसर PSMA को टारगेट करता है। अगर शरीर में ऐसे हिस्से मौजूद हैं जहां प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाएं अधिक मात्रा में PSMA व्यक्त कर रही हैं, तो वहां रेडियोट्रेसर का अधिक जमाव दिखाई दे सकता है। PET इमेज इस गतिविधि को दिखाती है, जबकि CT इमेज उस हिस्से की शारीरिक स्थिति और स्थान को समझने में मदद करती है। इससे डॉक्टर को बीमारी की पूरी तस्वीर समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर PET-CT की तरह PSMA PET-CT भी हर कैंसर कोशिका को नहीं पकड़ सकता और कुछ मामलों में अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है।
PSMA PET-CT की प्रक्रिया आमतौर पर सरल होती है। सबसे पहले मरीज की बांह की नस में IV लगाया जाता है और इसके जरिए PSMA रेडियोट्रेसर दिया जाता है। रेडियोट्रेसर को शरीर में फैलने और लक्षित कोशिकाओं से जुड़ने के लिए कुछ समय दिया जाता है। इस दौरान मरीज को आराम से बैठने या लेटने के लिए कहा जा सकता है। आमतौर पर लगभग एक घंटे के बाद मरीज को PET-CT मशीन पर लिटाया जाता है। स्कैन के दौरान मरीज को कुछ समय तक बिना हिले लेटना होता है। PET और CT दोनों की इमेज ली जाती हैं। SNMMI के अनुसार, PET-CT की इमेजिंग प्रक्रिया लगभग 30 मिनट की हो सकती है, जबकि पूरी प्रक्रिया में रेडियोट्रेसर के शरीर में फैलने का समय भी शामिल होता है।
तैयारी आपके डॉक्टर और इस्तेमाल किए जाने वाले रेडियोट्रेसर के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए जांच से पहले दिए गए निर्देशों का ध्यान से पालन करना जरूरी है। अपनी सभी दवाओं, पहले से मौजूद बीमारियों और किसी भी महत्वपूर्ण मेडिकल जानकारी के बारे में डॉक्टर या न्यूक्लियर मेडिसिन टीम को बताएं। यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो इसके बारे में भी जांच से पहले डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए।
PSMA PET-CT का एक बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर में कैंसर की संभावित जगह और उसके फैलाव की जानकारी एक साथ देने में मदद करता है। PET कैंसर से जुड़ी जैविक गतिविधि की जानकारी देता है, जबकि CT शरीर की संरचना और संबंधित हिस्से का स्थान दिखाता है। यह जांच प्रोस्टेट कैंसर की स्टेजिंग, इलाज के बाद कैंसर के दोबारा आने की जांच और कुछ मरीजों में शरीर के दूसरे हिस्सों तक बीमारी के फैलाव का मूल्यांकन करने में उपयोगी हो सकती है। इसकी मदद से डॉक्टर उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की उपचार योजना बनाने में बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
PSMA PET-CT आमतौर पर दर्दनाक जांच नहीं होती। इसमें मुख्य असुविधा नस में IV लगाने और रेडियोट्रेसर देने के दौरान हो सकती है। इसके बाद मरीज को स्कैन के दौरान मशीन पर स्थिर रहना होता है। PET-CT एक गैर-सर्जिकल जांच है और इसमें शरीर के अंदर कोई उपकरण डालने की जरूरत नहीं होती।
PSMA PET-CT में रेडियोट्रेसर की बहुत कम मात्रा का इस्तेमाल किया जाता है। रेडियोट्रेसर समय के साथ अपनी रेडियोएक्टिविटी खोता है और शरीर से मुख्य रूप से प्राकृतिक तरीके से बाहर निकलता है। जांच के बाद पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जा सकती है, ताकि शरीर से रेडियोट्रेसर बाहर निकलने में मदद मिले। फिर भी, हर मरीज की स्थिति अलग होती है। इसलिए जांच से पहले डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री और दवाओं के बारे में जानकारी देना जरूरी है।
PSMA PET-CT रिपोर्ट में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में रेडियोट्रेसर के जमाव और CT इमेज पर दिखाई देने वाली संरचनात्मक जानकारी का विवरण दिया जाता है। रिपोर्ट को न्यूक्लियर मेडिसिन विशेषज्ञ या रेडियोलॉजी विशेषज्ञ द्वारा देखा और समझाया जाता है। ध्यान रखना जरूरी है कि किसी इमेजिंग जांच का परिणाम अकेले अंतिम निदान तय नहीं करता। डॉक्टर PSA स्तर, बायोप्सी, MRI, पहले हुए इलाज और अन्य मेडिकल जानकारी के साथ PSMA PET-CT के परिणामों को देखते हैं। कुछ मामलों में अतिरिक्त MRI, CT या बायोप्सी की जरूरत भी पड़ सकती है।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन और PET-CT सेवाओं के माध्यम से मरीजों की जरूरत के अनुसार विभिन्न जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। PSMA PET-CT जैसी जांचों में सही रेडियोट्रेसर, उचित प्रोटोकॉल और अनुभवी न्यूक्लियर मेडिसिन विशेषज्ञ की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जांच कराने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही PET-CT जांच का चयन करना जरूरी है, क्योंकि हर मरीज के लिए एक ही प्रकार का PET-CT उपयुक्त नहीं होता।
PSMA PET-CT स्कैन प्रोस्टेट कैंसर की जांच और बीमारी के फैलाव का मूल्यांकन करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधुनिक इमेजिंग तकनीक है। यह PET की कार्यात्मक जानकारी और CT की संरचनात्मक जानकारी को एक साथ जोड़ती है। PSMA को टारगेट करने वाला रेडियोट्रेसर प्रोस्टेट कैंसर से जुड़ी संभावित कोशिकाओं की पहचान में मदद कर सकता है। इसका उपयोग बीमारी की स्टेजिंग, इलाज के बाद कैंसर के दोबारा आने की आशंका के मूल्यांकन और संभावित मेटास्टेसिस की जांच में किया जा सकता है। हालांकि, PSMA PET-CT की रिपोर्ट को हमेशा मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांचों के साथ समझना चाहिए। डॉक्टर ही यह तय करते हैं कि यह जांच आपके लिए जरूरी है या नहीं और इसके परिणाम के आधार पर आगे कौन-सा कदम उचित रहेगा।
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