Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
हालाँकि, ब्रेस्ट कैंसर का पता चलने का अर्थ यह नहीं है कि बीमारी का इलाज संभव नहीं है। समय पर पहचान, सही जाँच और उचित उपचार से कई मरीजों को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को पहचानना, नियमित स्वास्थ्य जाँच के महत्व को समझना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेवाएँ डॉक्टरों को कैंसर की जाँच और बीमारी के फैलाव का मूल्यांकन करने में सहायता कर सकती हैं।
ब्रेस्ट कैंसर तब विकसित होता है जब स्तन की कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह कैंसर दूध बनाने वाली ग्रंथियों, जिन्हें लोब्यूल्स कहा जाता है, या दूध ले जाने वाली नलिकाओं, जिन्हें डक्ट्स कहते हैं, में शुरू हो सकता है। कुछ मामलों में कैंसर आसपास के ऊतकों या शरीर के दूसरे अंगों तक भी फैल सकता है। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में अधिक पाया जाता है, लेकिन पुरुषों को भी यह बीमारी हो सकती है। स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती। फिर भी, किसी नई गांठ, त्वचा में बदलाव या निप्पल से असामान्य स्राव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं है। यह कई जैविक, आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों से जुड़ा हो सकता है।
उम्र: उम्र बढ़ने के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है, हालाँकि यह कम उम्र की महिलाओं में भी हो सकता है।
पारिवारिक इतिहास: परिवार में ब्रेस्ट कैंसर या ओवरी कैंसर का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ सकता है। BRCA1 और BRCA2 जैसे कुछ जीनों में बदलाव भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
हार्मोन संबंधी कारक: मासिक धर्म जल्दी शुरू होना, मेनोपॉज देर से होना और कुछ हार्मोन संबंधी स्थितियाँ जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
जीवनशैली: शारीरिक गतिविधि की कमी, शराब का सेवन और मेनोपॉज के बाद अधिक वजन कुछ महिलाओं में जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इन जोखिम कारकों का होना यह निश्चित नहीं करता कि किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर होगा। इसी तरह, बिना किसी स्पष्ट जोखिम कारक के भी यह बीमारी हो सकती है।
ब्रेस्ट कैंसर के कई प्रकार होते हैं। इनकी पहचान कैंसर कोशिकाओं की उत्पत्ति और उनकी जैविक विशेषताओं के आधार पर की जाती है।
डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू (DCIS): इसमें असामान्य कोशिकाएँ दूध की नलिकाओं के अंदर होती हैं और आसपास के स्तन ऊतकों में नहीं फैलतीं। इसे गैर-आक्रामक ब्रेस्ट कैंसर का एक प्रकार माना जाता है।
इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा: यह ब्रेस्ट कैंसर का आम प्रकार है। इसकी शुरुआत दूध की नलिकाओं में होती है, लेकिन यह आसपास के स्तन ऊतकों में फैल सकता है।
इनवेसिव लोब्यूलर कार्सिनोमा: यह दूध बनाने वाली ग्रंथियों से शुरू होता है और आसपास के ऊतकों में फैल सकता है।
ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर: इस प्रकार के कैंसर में एस्ट्रोजन रिसेप्टर, प्रोजेस्टेरोन रिसेप्टर और HER2 की जाँच नकारात्मक होती है। इसकी उपचार योजना अन्य प्रकारों से अलग हो सकती है।
कैंसर का सही प्रकार और उसकी जैविक विशेषताएँ जानने के लिए बायोप्सी और आवश्यक रिसेप्टर जाँच महत्वपूर्ण होती हैं।
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती चरण में हमेशा स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए स्तनों में किसी नए बदलाव को पहचानना और उसकी जाँच कराना महत्वपूर्ण है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
स्तन में नई गांठ या मोटापन महसूस होना।
स्तन के आकार या बनावट में बदलाव।
स्तन की त्वचा पर गड्ढे पड़ना या त्वचा का सिकुड़ना।
निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना।
निप्पल से असामान्य या खून मिला स्राव होना।
स्तन की त्वचा पर लालिमा, सूजन या संतरे के छिलके जैसी बनावट दिखाई देना।
बगल में गांठ या लिम्फ नोड्स का बढ़ना।
इनमें से कोई भी लक्षण होने का अर्थ हमेशा कैंसर नहीं होता। हार्मोनल बदलाव और संक्रमण जैसी स्थितियाँ भी कुछ लक्षण पैदा कर सकती हैं। लेकिन लगातार बने रहने वाले या नए बदलावों के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
ब्रेस्ट कैंसर की पहचान के लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षण, इमेजिंग और आवश्यकता पड़ने पर ऊतक की जाँच का उपयोग करते हैं।
1. मैमोग्राफी: इसमें कम मात्रा में एक्स-रे का इस्तेमाल करके स्तनों की तस्वीरें ली जाती हैं। मैमोग्राफी स्क्रीनिंग और संदिग्ध बदलावों की जाँच में उपयोगी होती है।
2. ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड: इस जाँच में ध्वनि तरंगों से स्तनों की तस्वीरें बनाई जाती हैं। इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिल सकती है कि गांठ ठोस है या तरल से भरी हुई है।
3. बायोप्सी: यदि किसी बदलाव में कैंसर की आशंका हो, तो प्रभावित ऊतक का छोटा नमूना लेकर उसकी जाँच की जाती है। कैंसर की पुष्टि और उसके प्रकार की पहचान के लिए बायोप्सी महत्वपूर्ण है।
4. MRI: कुछ मामलों में ब्रेस्ट MRI की सलाह दी जाती है, विशेषकर जब बीमारी की सीमा का अधिक विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक हो या महिला का जोखिम अधिक हो।
PET-CT एक उन्नत इमेजिंग जाँच है, जिसमें पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) और कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT) को मिलाकर शरीर की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जाती है। इसमें आमतौर पर FDG नामक रेडियोएक्टिव ट्रेसर का उपयोग किया जाता है, जो शरीर में कुछ ऐसी कोशिकाओं की गतिविधि दिखाता है जिनमें ग्लूकोज का उपयोग अधिक होता है।
ब्रेस्ट कैंसर में PET-CT का उपयोग मुख्य रूप से कुछ मरीजों में कैंसर के फैलाव का मूल्यांकन करने, बीमारी का चरण निर्धारित करने और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया देखने के लिए किया जा सकता है। यह विशेष रूप से तब उपयोगी हो सकता है जब स्थानीय रूप से उन्नत बीमारी या दूर के अंगों तक कैंसर फैलने की आशंका हो।
हालाँकि, PET-CT हर ब्रेस्ट कैंसर मरीज के लिए आवश्यक नहीं है। शुरुआती चरण में मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और बायोप्सी अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। PET-CT अकेले ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि नहीं करता और न ही यह सभी छोटे ट्यूमर का पता लगा सकता है। जाँच का चुनाव डॉक्टर मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार करते हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध PET-CT जैसी डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेवाएँ डॉक्टरों को उचित मामलों में कैंसर के मूल्यांकन में सहायता प्रदान कर सकती हैं।
ब्रेस्ट कैंसर का उपचार उसके प्रकार, चरण, हार्मोन रिसेप्टर की स्थिति, HER2 स्थिति और मरीज के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। सर्जरी के माध्यम से ट्यूमर या आवश्यकता के अनुसार स्तन के अधिक हिस्से को हटाया जा सकता है। रेडिएशन थेरेपी का उपयोग कुछ मरीजों में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है। कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का चयन कैंसर की विशेषताओं के आधार पर किया जा सकता है। उपचार की योजना विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा तैयार की जाती है। नियमित फॉलो-अप से उपचार के परिणामों का मूल्यांकन करने और भविष्य में किसी बदलाव की पहचान करने में मदद मिलती है।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को समय पर पहचानना और उचित जाँच कराना महत्वपूर्ण है। मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और बायोप्सी इसकी पहचान में अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि PET-CT का उपयोग चुनिंदा मरीजों में बीमारी के फैलाव और उपचार की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करने के लिए किया जा सकता है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेवाएँ चिकित्सकीय मूल्यांकन में सहायता करती हैं। स्तन में किसी नई गांठ या असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें और सही जाँच के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।
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