Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन, ऊर्जा को स्टोर करने और शरीर से कुछ हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने जैसे कई जरूरी काम करता है। जब लिवर की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं और कैंसर बनता है, तो इसे लिवर कैंसर कहा जाता है। वयस्कों में हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (HCC) लिवर कैंसर का सबसे आम प्रकार है। लिवर कैंसर का समय पर पता लगाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड टेस्ट और जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, CT, MRI या अन्य जांचों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ मामलों में PET-CT स्कैन भी कैंसर की स्थिति और शरीर में उसके फैलाव को समझने में मदद कर सकता है।
लिवर कैंसर क्या होता है?
लिवर कैंसर तब होता है जब लिवर की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव होने लगते हैं और वे नियंत्रण से बाहर बढ़ने लगती हैं। लिवर में शुरू होने वाले कैंसर को प्राथमिक लिवर कैंसर कहा जाता है। वहीं, शरीर के किसी दूसरे हिस्से में शुरू हुआ कैंसर अगर लिवर तक फैल जाए, तो उसे प्राथमिक लिवर कैंसर नहीं कहा जाता। लिवर कैंसर का खतरा कुछ लंबे समय से चली आ रही लिवर की समस्याओं के कारण बढ़ सकता है। इनमें लंबे समय का हेपेटाइटिस B या C संक्रमण और लिवर सिरोसिस जैसे कारण शामिल हैं। हालांकि, जोखिम होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को लिवर कैंसर जरूर होगा।
Liver Cancer Symptoms
क्या हो सकते हैं?
लिवर कैंसर के शुरुआती चरण में हमेशा स्पष्ट लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ लोगों में अलग-अलग लक्षण दिखाई दे सकते हैं। Liver cancer
symptoms में पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या परेशानी, पेट में सूजन, बिना किसी स्पष्ट कारण वजन कम होना, भूख कम लगना, जल्दी पेट भरना और कमजोरी शामिल हो सकते हैं। कुछ लोगों में त्वचा या आंखों का पीला पड़ना, आसानी से चोट लगना या खून आना, मतली और उल्टी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। इनमें से कोई भी लक्षण केवल लिवर कैंसर की पुष्टि नहीं करता। ऐसे लक्षण दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार या असामान्य लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
Liver Cancer
Diagnosis कैसे किया जाता है?
Liver cancer diagnosis के लिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों को समझने के बाद जरूरत के अनुसार अलग-अलग जांच कर सकते हैं। ब्लड टेस्ट में लिवर फंक्शन टेस्ट और AFP (Alpha-fetoprotein) जैसे टेस्ट शामिल हो सकते हैं। AFP का स्तर कुछ लिवर कैंसर मरीजों में बढ़ सकता है, लेकिन इसका बढ़ा हुआ स्तर अकेले लिवर कैंसर की पुष्टि नहीं करता। कुछ गैर-कैंसर स्थितियों में भी AFP बढ़ सकता है। इमेजिंग जांचों में अल्ट्रासाउंड, CT और MRI का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मामलों में CT या MRI की विशेष तकनीकें लिवर में मौजूद गांठ या असामान्य हिस्से को समझने में मदद करती हैं। कुछ मरीजों में जरूरत के अनुसार बायोप्सी भी की जा सकती है, हालांकि हर मामले में बायोप्सी जरूरी नहीं होती।
PET-CT क्या होता है?
PET-CT एक ऐसी इमेजिंग जांच है जिसमें PET और CT को एक ही प्रक्रिया में जोड़ा जाता है। CT शरीर के अंदर मौजूद अंगों और संरचनाओं की तस्वीर देता है, जबकि PET शरीर के ऊतकों की गतिविधि से जुड़ी जानकारी देता है। PET में एक रेडियोट्रेसर की थोड़ी मात्रा शरीर में दी जाती है। आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले FDG जैसे ट्रेसर से शरीर में ग्लूकोज के इस्तेमाल से जुड़ी गतिविधि देखी जाती है। कुछ कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ग्लूकोज का अधिक इस्तेमाल कर सकती हैं, इसलिए वे PET इमेज में अलग दिखाई दे सकती हैं।
Liver Cancer PET-CT की क्या भूमिका है?
Liver cancer PET-CT का इस्तेमाल हर मरीज में जरूरी नहीं होता। डॉक्टर मरीज की स्थिति और पहले से हुई जांचों के आधार पर तय करते हैं कि PET-CT की जरूरत है या नहीं। कुछ मामलों में PET-CT का उपयोग यह समझने में मदद के लिए किया जा सकता है कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैला है या नहीं। यह जानकारी बीमारी की स्टेज को समझने और आगे के इलाज की योजना बनाने में उपयोगी हो सकती है।
PET-CT का इस्तेमाल कुछ मामलों में इलाज के असर को देखने या इलाज के बाद बीमारी के वापस आने का आकलन करने में भी किया जाता है। हालांकि, PET-CT को लिवर कैंसर की पुष्टि करने वाली एकमात्र जांच नहीं माना जाना चाहिए। खासकर लिवर में शुरुआती या छोटे बदलावों के लिए डॉक्टर CT या MRI जैसी अन्य इमेजिंग जांचों को अधिक महत्वपूर्ण मान सकते हैं।
PET-CT स्कैन में क्या होता है?
PET-CT से पहले डॉक्टर मरीज को कुछ विशेष तैयारी के बारे में बता सकते हैं। तैयारी इस बात पर निर्भर करती है कि किस प्रकार का PET-CT किया जाना है और कौन-सा ट्रेसर इस्तेमाल किया जाएगा। स्कैन के दौरान रेडियोट्रेसर की थोड़ी मात्रा दी जाती है और शरीर को इसे अवशोषित करने के लिए कुछ समय दिया जाता है। इसके बाद मरीज PET-CT मशीन पर लेटता है और शरीर की इमेज ली जाती है। PET और CT की जानकारी को मिलाकर डॉक्टर शरीर में असामान्य गतिविधि और उसकी जगह को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
PET-CT रिपोर्ट में क्या जानकारी मिल सकती है?
PET-CT रिपोर्ट में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देने वाली गतिविधि और CT पर दिखाई देने वाली संरचनात्मक जानकारी का वर्णन किया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति में लिवर कैंसर पहले से diagnosed है, तो PET-CT कुछ मामलों में बीमारी के शरीर में फैलाव, इलाज के बाद बदलाव या बीमारी के वापस आने से जुड़ी जानकारी देने में मदद कर सकता है। रिपोर्ट को हमेशा डॉक्टर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी जांचों के साथ देखकर समझते हैं।
क्या PET-CT लिवर कैंसर की पुष्टि करता है?
PET-CT में किसी हिस्से में अधिक गतिविधि दिखाई देने का मतलब अपने आप में कैंसर होना नहीं है। कुछ गैर-कैंसर स्थितियों में भी PET पर अधिक गतिविधि दिखाई दे सकती है। इसी तरह PET-CT में सामान्य परिणाम आने से भी हर स्थिति में कैंसर की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती। इसलिए PET-CT रिपोर्ट को अकेले देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार CT, MRI, ब्लड टेस्ट या बायोप्सी जैसी अन्य जांचों के परिणामों को भी देखते हैं।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में PET-CT
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं के माध्यम से PET-CT जैसी इमेजिंग जांचों में सहायता उपलब्ध है। डॉक्टर मरीज की मेडिकल स्थिति और पहले से उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर उचित जांच की सलाह दे सकते हैं। लिवर से जुड़ी किसी समस्या में सही जांच का चुनाव मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए PET-CT या किसी अन्य स्कैन को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कराना चाहिए।
निष्कर्ष
लिवर कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसके लक्षण और जांच हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार परेशानी, बिना कारण वजन कम होना, भूख कम लगना, पीलिया या अन्य असामान्य बदलाव दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। Liver cancer
diagnosis में ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, CT, MRI और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मरीजों में PET-CT scan for liver cancer बीमारी के फैलाव और इलाज से जुड़े बदलावों को समझने में मदद कर सकता है।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं की मदद से डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी जांच कराई जा सकती है। सही समय पर मेडिकल सलाह और उचित जांच बीमारी को समझने और आगे की उपचार योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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