Dr. Nikunj Jain
Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC
ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों की मजबूती और घनत्व कम होने लगता है। इससे हड्डियां कमजोर और आसानी से टूटने वाली हो सकती हैं। इस बीमारी को अक्सर “साइलेंट डिजीज” कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते और कई लोगों को इसका पता हड्डी टूटने के बाद चलता है। उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन यह केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। कुछ दवाएं, हार्मोन में बदलाव, कम शारीरिक गतिविधि, पोषण की कमी और कुछ अन्य बीमारियां भी हड्डियों को कमजोर कर सकती हैं। समय पर जांच और सही देखभाल से हड्डियों की सेहत पर ध्यान दिया जा सकता है।
हमारी हड्डियां बाहर से मजबूत दिखाई देती हैं, लेकिन उनके अंदर लगातार बदलाव होते रहते हैं। शरीर पुरानी हड्डी को तोड़ता है और नई हड्डी बनाता है। जब हड्डी टूटने की प्रक्रिया नई हड्डी बनने से ज्यादा होने लगती है, तो हड्डियों का घनत्व और मजबूती कम हो सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां इतनी कमजोर हो सकती हैं कि मामूली गिरने या सामान्य गतिविधियों के दौरान भी फ्रैक्चर हो सकता है। कूल्हे, रीढ़ की हड्डी और कलाई की हड्डियां अक्सर प्रभावित हो सकती हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस का कोई एक कारण नहीं होता। कई अलग-अलग कारण और जोखिम इसे बढ़ा सकते हैं। उम्र बढ़ना इसका एक महत्वपूर्ण कारण है, क्योंकि उम्र के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से भी हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। पुरुषों में भी उम्र बढ़ने और कुछ हार्मोनल समस्याओं के कारण ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है।
खाने में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और ज्यादा शराब का सेवन भी हड्डियों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस या हिप फ्रैक्चर का इतिहास होने पर भी जोखिम बढ़ सकता है। कुछ बीमारियां और लंबे समय तक ली जाने वाली कुछ दवाएं, जैसे ग्लूकोकॉर्टिकोइड स्टेरॉयड, भी हड्डियों के कमजोर होने का कारण बन सकती हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत में आमतौर पर कोई खास लक्षण नहीं होता। इसी कारण इसे साइलेंट डिजीज कहा जाता है। जब हड्डियां काफी कमजोर हो जाती हैं, तब फ्रैक्चर इसका पहला संकेत हो सकता है। रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने पर तेज कमर दर्द, लंबाई कम होना या शरीर का आगे की ओर झुकना जैसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं। अगर मामूली चोट या सामान्य गतिविधि के बाद हड्डी टूट जाती है, तो डॉक्टर ऑस्टियोपोरोसिस की जांच की सलाह दे सकते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस को इसके कारण और व्यक्ति की स्थिति के आधार पर अलग-अलग तरीके से समझा जा सकता है। प्राइमरी ऑस्टियोपोरोसिस उम्र बढ़ने और हार्मोन में होने वाले बदलावों से जुड़ा हो सकता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद इसका खतरा बढ़ सकता है, जबकि पुरुषों में बढ़ती उम्र के साथ जोखिम बढ़ता है। सेकेंडरी ऑस्टियोपोरोसिस किसी दूसरी बीमारी या दवा के कारण हो सकता है। कुछ हार्मोन संबंधी बीमारियां, लंबे समय तक कुछ दवाओं का इस्तेमाल और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हड्डियों की मजबूती को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ बच्चों और किशोरों में दुर्लभ स्थिति के रूप में जुवेनाइल ऑस्टियोपोरोसिस भी हो सकता है।
क्योंकि ऑस्टियोपोरोसिस में शुरुआत में लक्षण नहीं होते, इसलिए सही समय पर जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, पिछली फ्रैक्चर की जानकारी, परिवार का इतिहास, दवाओं, खान-पान और जीवनशैली जैसे कई कारकों को ध्यान में रखते हैं। जांच का उद्देश्य केवल ऑस्टियोपोरोसिस का पता लगाना ही नहीं होता, बल्कि यह समझना भी होता है कि हड्डियों की स्थिति कैसी है और भविष्य में फ्रैक्चर का जोखिम कितना हो सकता है।
हड्डियों की मजबूती और घनत्व जांचने के लिए सबसे आम टेस्ट DEXA या DXA स्कैन है। इसे बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट भी कहा जाता है। इस जांच में कम मात्रा की एक्स-रे का इस्तेमाल करके हड्डियों में मौजूद कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स की मात्रा का आकलन किया जाता है। आमतौर पर कूल्हे और रीढ़ की हड्डी की बोन डेंसिटी मापी जाती है, क्योंकि ये जगहें फ्रैक्चर के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। DEXA स्कैन एक तेज, बिना दर्द वाली और नॉन-इनवेसिव जांच है। डॉक्टर इसकी रिपोर्ट के आधार पर हड्डियों की स्थिति और फ्रैक्चर के जोखिम का आकलन कर सकते हैं।
DEXA रिपोर्ट में T-score दिया जा सकता है, खासकर पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं और 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुषों में। सामान्य तौर पर T-score -1 या उससे अधिक होने पर बोन डेंसिटी सामान्य मानी जाती है। -1 से -2.5 के बीच का स्कोर कम बोन डेंसिटी या ऑस्टियोपेनिया को दिखा सकता है, जबकि -2.5 या उससे कम ऑस्टियोपोरोसिस की ओर संकेत कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट की व्याख्या व्यक्ति की उम्र, लिंग, स्वास्थ्य स्थिति और फ्रैक्चर के जोखिम को ध्यान में रखकर डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए।
कुछ मामलों में डॉक्टर DEXA के अलावा अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, एड़ी की हड्डी की जांच के लिए क्वांटिटेटिव अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है। हालांकि, यह बोन मिनरल डेंसिटी को उसी तरह नहीं मापता जैसे DEXA करता है और अगर इसमें हड्डियों के कमजोर होने का संकेत मिले, तो आगे DEXA की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार खून की जांच या अन्य टेस्ट भी लिख सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें हड्डियों के कमजोर होने के पीछे किसी दूसरी बीमारी या कारण का संदेह हो।
जांच की जरूरत व्यक्ति की उम्र और जोखिम कारकों पर निर्भर करती है। बढ़ती उम्र, मेनोपॉज, पहले हो चुका फ्रैक्चर, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास, कम वजन, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल जोखिम बढ़ा सकता है। यदि आपको इनमें से कोई जोखिम कारक है, तो डॉक्टर से बात करके यह पता करना उचित है कि आपके लिए बोन डेंसिटी टेस्ट की जरूरत है या नहीं।
हड्डियों की सेहत के लिए संतुलित भोजन, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली महत्वपूर्ण हैं। वजन उठाने वाली गतिविधियां, जैसे चलना, हड्डियों की सेहत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। धूम्रपान से बचना और ज्यादा शराब का सेवन न करना भी महत्वपूर्ण है। अगर डॉक्टर ने ऑस्टियोपोरोसिस के लिए दवा लिखी है, तो उसे उनकी सलाह के अनुसार लेना चाहिए और बिना सलाह के दवा बंद नहीं करनी चाहिए।
मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं के माध्यम से हड्डियों की सेहत से जुड़ी जांचों में सहायता प्रदान की जाती है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार बोन डेंसिटी की जांच हड्डियों की स्थिति को समझने और फ्रैक्चर के जोखिम का आकलन करने में उपयोगी हो सकती है। जांच का सही प्रकार व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर तय किया जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। इसकी शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता, इसलिए सही समय पर जांच महत्वपूर्ण है। DEXA या DXA स्कैन हड्डियों की मिनरल डेंसिटी मापने और ऑस्टियोपोरोसिस की पहचान करने के लिए सबसे आम जांचों में से एक है। अगर आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री या अन्य जोखिम कारकों के कारण ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच कराना हड्डियों की सेहत को समझने में मदद कर सकता है।
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