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कोरोनरी आर्टरी डिजीज: प्रकार, लक्षण, कारण और PET-CT से जाँच

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Dr. Nikunj Jain

Dr. Nikunj Jain

Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,

MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC

कोरोनरी आर्टरी डिजीज: प्रकार, लक्षण, कारण और PET-CT से जाँच

 जब दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुँचती, तो सीने में दर्द, साँस फूलना और हार्ट अटैक जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इस बीमारी के लक्षणों को समय पर पहचानना और सही जाँच करवाना जरूरी है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेवाएँ डॉक्टरों को कुछ बीमारियों की जाँच में मदद कर सकती हैं। कुछ मरीजों में कार्डियक PET-CT स्कैन से दिल की मांसपेशियों तक खून पहुँचने की स्थिति का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज क्या है?

हमारा दिल पूरे शरीर में खून पहुँचाने का काम करता है। दिल की मांसपेशियों को भी काम करने के लिए खून और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। कोरोनरी धमनियाँ दिल तक खून पहुँचाती हैं। जब इन धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल, फैट और दूसरे पदार्थ जमा होने लगते हैं, तो रास्ता संकरा हो सकता है। इससे दिल तक खून कम पहुँचता है। इस स्थिति को कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहते हैं। अगर धमनी में अचानक खून का थक्का बनकर रास्ता बंद हो जाए, तो हार्ट अटैक हो सकता है। इसलिए समय पर जाँच और इलाज जरूरी है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज के लक्षण

कोरोनरी आर्टरी डिजीज के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों को शुरुआत में कोई परेशानी महसूस नहीं होती, जबकि दूसरों को रोजमर्रा के काम करते समय भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके आम लक्षण हैं:

  • सीने में दर्द: छाती में दबाव, भारीपन, जकड़न या दर्द महसूस होना।

  • साँस फूलना: चलते समय, सीढ़ियाँ चढ़ते समय या थोड़ी मेहनत करने पर साँस लेने में परेशानी होना।

  • जल्दी थकना: सामान्य काम करते हुए भी बहुत थकान महसूस होना।

  • दर्द का दूसरी जगह फैलना: सीने का दर्द हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक जा सकता है।

  • चक्कर आना: कुछ लोगों को कमजोरी, चक्कर या बेचैनी महसूस हो सकती है।

महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज वाले लोगों में लक्षण अलग हो सकते हैं। अगर सीने में तेज या लगातार दर्द हो, साँस लेने में परेशानी हो या ठंडा पसीना आए, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण

इस बीमारी का मुख्य कारण दिल की धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल का जमा होना है। इससे खून का रास्ता संकरा हो जाता है और दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त खून नहीं पहुँच पाता। कुछ चीजें इस बीमारी का खतरा बढ़ा सकती हैं:

हाई कोलेस्ट्रॉल: खून में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL बढ़ने से धमनियों में फैट जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर: लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने से धमनियों को नुकसान पहुँच सकता है।

डायबिटीज: ब्लड शुगर ज्यादा रहने से दिल और खून की नसों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

धूम्रपान: सिगरेट और तंबाकू का सेवन दिल और धमनियों की सेहत को नुकसान पहुँचाता है।

मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि: वजन बढ़ना और लंबे समय तक शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है।

परिवार में हृदय रोग का इतिहास: अगर परिवार में किसी को कम उम्र में हृदय रोग हुआ है, तो आपका जोखिम भी बढ़ सकता है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज के प्रकार

1. स्टेबल एंजाइना (Stable Angina)

इसमें चलने, व्यायाम करने या तनाव के दौरान सीने में दर्द या दबाव महसूस हो सकता है। आराम करने पर यह परेशानी कम हो सकती है। फिर भी डॉक्टर से जाँच करवाना जरूरी है।

2. अनस्टेबल एंजाइना (Unstable Angina)

इसमें सीने का दर्द अचानक शुरू हो सकता है, पहले से ज्यादा हो सकता है या आराम करते समय भी हो सकता है। यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है और इसमें तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत होती है।

3. हार्ट अटैक (Heart Attack)

जब दिल की किसी धमनी में खून का रास्ता गंभीर रूप से बंद हो जाता है, तो दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुँच सकता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।

4. साइलेंट कोरोनरी आर्टरी डिजीज

कुछ लोगों में दिल की धमनियों में समस्या होने के बावजूद सीने में दर्द जैसे साफ लक्षण नहीं दिखाई देते। यह डायबिटीज वाले लोगों में भी हो सकता है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज की जाँच कैसे होती है?

डॉक्टर मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम कारकों को देखकर जाँच की सलाह देते हैं। इसके लिए ECG, ब्लड टेस्ट, इकोकार्डियोग्राफी, स्ट्रेस टेस्ट और CT कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी जाँचों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हर मरीज को सभी जाँचों की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार सही जाँच चुनते हैं। कुछ मामलों में दिल तक खून पहुँचने की स्थिति को समझने के लिए न्यूक्लियर कार्डियक इमेजिंग भी की जा सकती है।

कार्डियक PET-CT स्कैन की भूमिका

कार्डियक PET-CT स्कैन एक खास तरह की जाँच है। इसमें PET और CT तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। PET की मदद से शरीर के अंदर होने वाली कुछ गतिविधियों की जानकारी मिलती है, जबकि CT शरीर की अंदरूनी बनावट की तस्वीरें देता है। दिल की जाँच में PET स्कैन से यह समझने में मदद मिल सकती है कि दिल की मांसपेशियों के अलग-अलग हिस्सों तक पर्याप्त खून पहुँच रहा है या नहीं। इससे डॉक्टर उन हिस्सों की पहचान करने में मदद ले सकते हैं जहाँ खून का प्रवाह कम हो सकता है।

कार्डियक PET-CT स्कैन हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होता। डॉक्टर इसे मरीज के लक्षणों और दूसरी जाँचों के नतीजों के आधार पर सुझा सकते हैं। यह स्कैन हर स्थिति में धमनियों की रुकावट को सीधे नहीं दिखाता और न ही सभी मरीजों के लिए पहली जाँच है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेवाओं के बारे में जानकारी लेकर मरीज अपने डॉक्टर से पूछ सकते हैं कि उनके लिए कौन-सी जाँच सही रहेगी।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज का इलाज और बचाव

इस बीमारी का इलाज मरीज की स्थिति और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है। डॉक्टर कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाएँ और जरूरत के अनुसार दूसरी दवाएँ दे सकते हैं। कुछ मरीजों को एंजियोप्लास्टी, स्टेंट या बाईपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खाना खाएँ, नियमित शारीरिक गतिविधि करें, धूम्रपान से बचें और ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल तथा ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। अगर पहले से दिल की बीमारी है, तो व्यायाम या जीवनशैली में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

निष्कर्ष

कोरोनरी आर्टरी डिजीज दिल की धमनियों को प्रभावित करती है और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर समस्या बन सकती है। सीने में दर्द, साँस फूलना और असामान्य थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ECG, ब्लड टेस्ट और अन्य जाँचों के साथ कुछ मरीजों में कार्डियक PET-CT स्कैन दिल की मांसपेशियों तक खून पहुँचने की स्थिति समझने में मदद कर सकता है। सही जाँच चुनने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध डायग्नोस्टिक सेवाओं के बारे में जानकारी लेकर आप अपनी जाँच से जुड़े विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

यह दिल की धमनियों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने से धमनियाँ संकरी हो सकती हैं और दिल तक खून कम पहुँच सकता है।

इसके लक्षणों में सीने में दर्द या दबाव, साँस फूलना, जल्दी थकना और दर्द का हाथ, कंधे या जबड़े तक फैलना शामिल हैं।

इसका मुख्य कारण धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल का जमा होना है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और हाई कोलेस्ट्रॉल इसका खतरा बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टर ECG, ब्लड टेस्ट, स्ट्रेस टेस्ट, CT कोरोनरी एंजियोग्राफी या जरूरत के अनुसार दूसरी जाँचों की सलाह दे सकते हैं।

यह कुछ मरीजों में दिल की मांसपेशियों तक खून पहुँचने की स्थिति का आकलन करने में मदद कर सकता है।

नहीं। डॉक्टर मरीज की स्थिति और दूसरी जाँचों के आधार पर तय करते हैं कि PET-CT की जरूरत है या नहीं।

हाँ। दवाओं, जीवनशैली में बदलाव और जरूरत पड़ने पर एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

अगर सीने में तेज या लगातार दर्द हो, साँस लेने में परेशानी हो या ठंडा पसीना आए, तो तुरंत आपातकालीन मेडिकल सहायता लें।

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