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गैलियम ऑक्सी स्कैन: उद्देश्य, प्रक्रिया और फायदे

Talk to Health Expert

09 Oct, 2026

Dr. Nikunj Jain

Dr. Nikunj Jain

Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,

MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC

गैलियम ऑक्सी स्कैन: उद्देश्य, प्रक्रिया और फायदे

गैलियम स्कैन न्यूक्लियर मेडिसिन की एक विशेष जांच है, जिसका उपयोग शरीर में संक्रमण, सूजन और कुछ प्रकार के कैंसर का पता लगाने में मदद के लिए किया जाता है। यह जांच खासतौर पर उन मामलों में उपयोगी हो सकती है, जहां सामान्य जांचों से बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में आधुनिक जांच सुविधाओं की मदद से डॉक्टरों को बीमारी का आकलन करने और आगे की जांच या इलाज की योजना बनाने में सहायता मिलती है।

गैलियम स्कैन क्या होता है?

गैलियम स्कैन, जिसे गैलियम-67 स्कैन भी कहा जाता है, एक न्यूक्लियर मेडिसिन जांच है। इसमें गैलियम-67 नाम के रेडियोएक्टिव पदार्थ की थोड़ी मात्रा नस के जरिए शरीर में दी जाती है। इसके बाद एक खास कैमरा शरीर में इस पदार्थ के जमा होने की जगहों की तस्वीरें बनाता है। इन तस्वीरों से डॉक्टरों को शरीर में संक्रमण, सूजन या कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ी असामान्य गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल स्कैन के आधार पर हर बीमारी की पुष्टि नहीं होती। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दूसरी जांचें और मरीज के लक्षणों को भी देखते हैं।

गैलियम स्कैन क्यों किया जाता है?

डॉक्टर अलग-अलग स्थितियों में गैलियम स्कैन की सलाह दे सकते हैं। इसके प्रमुख उपयोग हैं:

  • लंबे समय से बुखार रहने पर उसका कारण जानने में मदद करना।
  • हड्डियों या रीढ़ में संक्रमण की जांच करना।
  • फेफड़ों और छाती में संक्रमण या सूजन का आकलन करना।
  • सारकॉइडोसिस जैसी कुछ सूजन से जुड़ी बीमारियों की जांच में मदद करना।
  • कुछ प्रकार के कैंसर का आकलन करने या इलाज के बाद बीमारी की स्थिति समझने में सहायता करना।

डॉक्टर मरीज की बीमारी और उपलब्ध दूसरी जांचों के आधार पर तय करते हैं कि गैलियम स्कैन सही विकल्प है या किसी दूसरी जांच की जरूरत है।

गैलियम स्कैन की प्रक्रिया कैसे होती है?

गैलियम स्कैन की प्रक्रिया आमतौर पर इन चरणों में पूरी होती है:

पहला चरण: मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और पहले की जांचों की जानकारी ली जाती है।

दूसरा चरण: गैलियम-67 की थोड़ी मात्रा नस में इंजेक्शन के जरिए दी जाती है।

तीसरा चरण: रेडियोएक्टिव पदार्थ को शरीर में फैलने और संबंधित हिस्सों में जमा होने के लिए समय दिया जाता है। स्कैन अक्सर इंजेक्शन के 6 से 48 घंटे बाद किया जाता है। कुछ मामलों में डॉक्टर एक से ज्यादा बार तस्वीरें लेने की सलाह दे सकते हैं।

चौथा चरण: मरीज को स्कैन टेबल पर सीधा लेटना होता है। खास कैमरा शरीर से निकलने वाले संकेतों को रिकॉर्ड करके तस्वीरें बनाता है। स्कैन के दौरान स्थिर रहना जरूरी होता है।

पांचवां चरण: न्यूक्लियर मेडिसिन विशेषज्ञ तस्वीरों का आकलन करके रिपोर्ट तैयार करते हैं।

गैलियम स्कैन से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?

इस जांच की तैयारी मरीज की स्थिति और जांच के उद्देश्य पर निर्भर करती है। कुछ मामलों में आंतों की सफाई के लिए दवा या एनीमा की जरूरत हो सकती है, ताकि तस्वीरों पर आंतों में मौजूद पदार्थ का असर कम हो। जांच से पहले डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं, एलर्जी, हाल में हुए दूसरे स्कैन और किसी भी पुरानी बीमारी के बारे में बताएं। अगर आप गर्भवती हैं, गर्भधारण की संभावना है या स्तनपान करा रही हैं, तो जांच से पहले इसकी जानकारी जरूर दें। डॉक्टर के निर्देशों के बिना दवा बंद न करें।

गैलियम स्कैन के फायदे

गैलियम स्कैन शरीर में संक्रमण और सूजन की जगह पहचानने में मदद कर सकता है, खासकर तब जब बीमारी का कारण स्पष्ट न हो। इससे डॉक्टरों को आगे की जांच चुनने, बीमारी का आकलन करने और कुछ मामलों में इलाज के असर को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आज कई स्थितियों में दूसरी इमेजिंग जांचें भी इस्तेमाल की जाती हैं। इसलिए हर मरीज के लिए गैलियम स्कैन जरूरी नहीं होता।

क्या गैलियम स्कैन सुरक्षित है?

गैलियम स्कैन में रेडियोएक्टिव पदार्थ की थोड़ी मात्रा इस्तेमाल होती है। जांच के दौरान इंजेक्शन वाली जगह पर थोड़ी देर दर्द या लालिमा हो सकती है। रेडिएशन से जुड़ा जोखिम आमतौर पर कम होता है, लेकिन डॉक्टर जांच की जरूरत और संभावित जोखिम को ध्यान में रखकर ही इसकी सलाह देते हैं। गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान विशेष सावधानी जरूरी है। जांच के बाद पानी पीने या अन्य सावधानियों के बारे में मेडिकल टीम के निर्देशों का पालन करें।

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में जांच का महत्व

मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध जांच सुविधाएं डॉक्टरों को विभिन्न बीमारियों का आकलन करने में मदद करती हैं। सही जांच का चुनाव मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए। जांच की रिपोर्ट को दूसरी चिकित्सकीय जानकारी के साथ समझना जरूरी है, ताकि आगे की जांच और इलाज की योजना सही तरीके से बनाई जा सके।

निष्कर्ष

गैलियम स्कैन एक विशेष न्यूक्लियर मेडिसिन जांच है, जो शरीर में संक्रमण, सूजन और कुछ प्रकार के कैंसर के आकलन में मदद कर सकती है। इसकी प्रक्रिया में रेडियोएक्टिव पदार्थ देने के बाद खास कैमरे से तस्वीरें ली जाती हैं। जांच की जरूरत और तैयारी हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में उपलब्ध जांच सुविधाओं के माध्यम से मरीज अपनी स्थिति के अनुसार उचित जांच और आगे की चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

यह न्यूक्लियर मेडिसिन जांच है, जिसमें गैलियम-67 की मदद से शरीर में संक्रमण, सूजन और कुछ प्रकार के कैंसर का आकलन किया जाता है।

इसका उपयोग लंबे समय से बुखार, कुछ संक्रमणों, सूजन से जुड़ी बीमारियों और कुछ कैंसर की जांच में मदद के लिए किया जा सकता है।

इंजेक्शन के बाद तस्वीरें लेने के लिए आमतौर पर 6 से 48 घंटे तक इंतजार करना पड़ सकता है। कैमरे से तस्वीरें लेने में लगभग 30 से 60 मिनट लग सकते हैं।

स्कैन के दौरान आमतौर पर दर्द नहीं होता। इंजेक्शन लगाते समय हल्की चुभन हो सकती है।

नहीं। स्कैन बीमारी का आकलन करने में मदद करता है, लेकिन कैंसर की पुष्टि के लिए दूसरी जांचों की जरूरत हो सकती है।

हर मामले में ऐसा जरूरी नहीं है। अपनी जांच से पहले मेडिकल टीम के निर्देशों का पालन करें।

इसमें रेडियोएक्टिव पदार्थ की थोड़ी मात्रा इस्तेमाल होती है। डॉक्टर जांच की जरूरत और संभावित जोखिम को देखकर इसकी सलाह देते हैं।

मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और दूसरी जांचों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि गैलियम स्कैन की जरूरत है या नहीं।

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