PET स्कैन कैंसर डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट मॉनिटरिंग के लिए सटीक इमेजिंग

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25 Feb, 2026

Dr. Nikunj Jain

Dr. Nikunj Jain

Co-Founder and HOD - Nuclear Medicine ,

MBBS, DRM, DNB, FEBNM, FANMB, Dip. CBNC

PET स्कैन कैंसर डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट मॉनिटरिंग के लिए सटीक इमेजिंग

पिछले कुछ दशकों में, कैंसर डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट में काफी तरक्की हुई है। PET-CT स्कैन मॉडर्न ऑन्कोलॉजी में एक महत्वपूर्ण विकास है। यह एक दर्द रहित और सुरक्षित डायग्नोस्टिक टूल है, जो डॉक्टरों को शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लगाने और ट्रीटमेंट मॉनिटरिंग में मदद करता है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेपी में हम उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाओं के साथ सटीक और विश्वसनीय देखभाल प्रदान करते हैं। इस ब्लॉग में हम PET-CT स्कैन, इसकी कार्यप्रणाली और कैंसर डायग्नोसिस में इसकी भूमिका पर चर्चा करेंगे।

PET स्कैन क्या है?

PET-CT स्कैन (पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी) एक भरोसेमंद डायग्नोस्टिक तकनीक है जो शरीर के भीतर मेटाबोलिक और फंक्शनल एक्टिविटी का पता लगाती है। इसमें एक सुरक्षित रेडियोएक्टिव ट्रेसर को नस के माध्यम से इंजेक्ट किया जाता है। कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक ग्लूकोज़ का उपयोग करती हैं, इसलिए वे अधिक ट्रेसर अवशोषित करती हैं और स्कैन इमेज में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।

PET को CT (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) के साथ जोड़ा जाता है, जिससे फंक्शनल और स्ट्रक्चरल दोनों प्रकार की जानकारी मिलती है। इससे डॉक्टर शरीर के अंदर असामान्य हिस्सों की सटीक पहचान कर पाते हैं।

PET स्कैन कैंसर का पता लगाने में कैसे मदद करता है?

PET स्कैन का मुख्य लाभ अर्ली डिटेक्शन है। यह कोशिकाओं के मेटाबॉलिज़्म में होने वाले बदलावों का पता लगाता है, जो CT या MRI में दिखाई देने से पहले कैंसर की पहचान में मदद करता है। यह बिनाइन और मैलिग्नेंट ट्यूमर के बीच अंतर करने और प्राइमरी ट्यूमर की पहचान में सहायक है।

कैंसर स्टेजिंग में भूमिका

स्टेजिंग वह प्रक्रिया है जिससे यह निर्धारित होता है कि कैंसर शरीर में कितना फैला है। PET-CT स्कैन लिम्फ नोड्स और मेटास्टेसिस की पहचान कर सटीक स्टेजिंग में मदद करता है। सही स्टेजिंग से डॉक्टर बेहतर ट्रीटमेंट प्लान बना सकते हैं, चाहे वह सर्जरी हो, कीमोथेरेपी हो या रेडिएशन थेरेपी।

ट्रीटमेंट रिस्पॉन्स की मॉनिटरिंग

PET-CT स्कैन यह निर्धारित करने में मदद करता है कि दिया गया इलाज कितना प्रभावी है। यह ट्यूमर के साइज से पहले मेटाबोलिक बदलावों को पहचान सकता है। यदि कैंसर कोशिकाओं की एक्टिविटी कम हो जाती है, तो इलाज प्रभावी माना जाता है।

  • बेकार थेरेपी से बचाव
  • अनावश्यक साइड इफेक्ट्स में कमी
  • पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लान
  • बेहतर परिणाम
  • दोबारा होने की जल्दी पहचान

ऐसी स्थितियां जहां PET स्कैन का उपयोग किया जाता है

  • फेफड़ों का कैंसर
  • ब्रेस्ट कैंसर
  • लिम्फोमा
  • कोलोरेक्टल कैंसर
  • सिर और गर्दन का कैंसर

यह हृदय और मस्तिष्क की कुछ स्थितियों में भी उपयोगी हो सकता है।

प्रोसीजर के दौरान क्या उम्मीद करें?

  • रेडियोएक्टिव ट्रेसर का इंजेक्शन
  • 45–60 मिनट का इंतजार (ट्रेसर सर्कुलेशन के लिए)
  • 20–30 मिनट का स्कैन समय
  • उसी दिन घर वापसी
  • स्कैन से 4–6 घंटे पहले उपवास की सलाह

क्या PET स्कैन सुरक्षित है?

हाँ, PET-CT स्कैन मेडिकल सुपरविजन में किया जाने वाला सुरक्षित और दर्द रहित टेस्ट है। इसमें उपयोग की जाने वाली रेडिएशन मात्रा नियंत्रित होती है और ट्रेसर शरीर से प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा निकल जाता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सलाह की आवश्यकता होती है।

कैंसर केयर में PET स्कैन के फायदे

  • सेलुलर स्तर पर बीमारी की पहचान
  • पूरे शरीर की इमेजिंग
  • सटीक स्टेजिंग
  • इलाज के असर की जल्दी पहचान
  • रोग की पुनरावृत्ति का पता लगाना

निष्कर्ष

PET-CT स्कैन केवल एक इमेजिंग टेस्ट नहीं है, बल्कि कैंसर डायग्नोसिस और मॉनिटरिंग के लिए एक प्रभावी साधन है। यह डॉक्टरों को जल्दी पहचान, सही स्टेजिंग और बेहतर इलाज योजना बनाने में मदद करता है। समय पर डायग्नोसिस और मॉनिटरिंग से कैंसर उपचार में सकारात्मक बदलाव संभव है।

Frequently Asked Questions

इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कैंसर का पता लगाने, स्टेज का पता लगाने और उसे मॉनिटर करने के लिए किया जाता है।

पूरे प्रोसेस में आमतौर पर लगभग 1.5 से 2 घंटे लगते हैं।

हाँ, मरीज़ों को आमतौर पर टेस्ट से 4–6 घंटे पहले फास्टिंग करने की सलाह दी जाती है।

नहीं, ट्रेसर के एक छोटे इंजेक्शन को छोड़कर इसमें दर्द नहीं होता है।

यह कई कैंसर के लिए बहुत असरदार है लेकिन बहुत छोटे या धीरे-धीरे बढ़ने वाले ट्यूमर का पता नहीं लगा सकता है।

हाँ, वे शुरुआती स्टेज में दोबारा होने का पता लगाने में बहुत उपयोगी हैं।

नहीं, रेडिएशन एक्सपोज़र कंट्रोल किया जाता है और इसे सुरक्षित माना जाता है।

हाँ, ज़्यादातर मरीज़ प्रोसीजर के तुरंत बाद नॉर्मल एक्टिविटीज़ पर लौट सकते हैं।

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